इस्लामनगर बुलडोजर से किया गया ध्वस्त...अवैध अतिक्रमण कर 'लैंड जिहाद' के जरिये था बनाया गया
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इस्लामनगर बुलडोजर से किया गया ध्वस्त…अवैध अतिक्रमण कर ‘लैंड जिहाद’ के जरिये था बनाया गया

मलकानगिरि जिले में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मोटू तहसील के अंतर्गत बारिबांछा एवं इस्लामनगर क्षेत्र से अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाया।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Apr 6, 2026, 09:59 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर। पिछली बीजद सरकार के शासन काल में मालकानगिरि जिले के मोटु तहसील क्षेत्र में जंगल जमीन पर अतिक्रमण कर मोहम्मद मासूम खान व उसके भाइयों द्वारा बनाये गये विशाल आर्थिक साम्राज्य को अंततः ढहा दिया गया । मलकानगिरि जिले में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मोटू तहसील के अंतर्गत बारिबांछा एवं इस्लामनगर क्षेत्र से अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाया। यह कार्रवाई ओडिशा उच्च न्यायालय द्वारा संबंधित याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद की गई। प्रशासन के अनुसार, इस अभियान में लगभग 22 एकड़ से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर सरकारी नियंत्रण में लिया गया, जो जिले की अब तक की सबसे बड़ी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मानी जा रही है।

2024 में पांचजन्य ने इस संबंध में अनेक विस्तृत रिपोर्टें जारी की थी जिसमें किस ढंग से गैर कानूनी तरीके से मोटु इलाके में जंगल जमीन पर अवैध कब्जा कर इसलाम नगर बनाये जाने के संबंध में विस्तृत खुलासा किया गया था । इसके साथ साथ इस कार्य में कैसे तत्कालीन सरकार व प्रशासन का सहयोग रहा था इसके बारे में भी खुलासा किया था ।

5 अप्रैल सुबह करीब 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले यह अभियान चला । जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट प्रथमेश अरविंद राजशेखर राजशिर्के और पुलिस अधीक्षक विनोद पाटिल प्रत्यक्ष तत्वावधान में यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई । किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन से आवश्यक तैयारी की थी । इस कारण मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जिसमें 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे। प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए 4 जेसीबी मशीन, एक एक्सकेवेटर और हाइड्रा मशीन का उपयोग किया।

उप जिलाधिकारी दुर्ज्योधन भोई की उपस्थिति में अवैध रूप से निर्मित तीन मंजिला भवन, एक दवा क्लिनिक, गोदाम तथा दो स्टोर रूम को ध्वस्त किया गया। इसके अलावा, वन भूमि पर बनाए गए 11 तालाबों को भी प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले लिया। उल्लेखनीय है कि इस भूमि पर तीन भाइयों—मोहम्मद मासूम खान, मोहम्मद हसन खान और मोहम्मद जमाल खान—द्वारा अवैध कब्जा किया गया था। प्रशासन ने इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए कब्जे में ली गई सभी संपत्तियों को जब्त कर लिया।
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए संबंधित पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय में तीन याचिकाएं (डब्ल्यूपीसी 14867/2022, 14868/2022 और 14870/2022) दायर की गई थीं। हालांकि, न्यायालय ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। अपने फैसले में न्यायमूर्ति डॉ. संजीव कुमार पाणिग्राही ने स्पष्ट किया कि सरकारी या वन भूमि पर लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने से स्वामित्व का अधिकार स्थापित नहीं हो जाता।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उन्हें वर्ष 1920 में जयपुर संस्थान के राजा विक्रम देव द्वारा ताम्रपत्र के माध्यम से भूमि प्रदान की गई थी, लेकिन वे इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में यह भी सामने आया कि वे भूमिहीन नहीं हैं। इसके अलावा, वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 13 दिसंबर 2005 से पहले तीन पीढ़ियों के निवास का प्रमाण देना आवश्यक होता है, जिसे प्रस्तुत करने में भी याचिकाकर्ता असफल रहे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त भूमि ग्राम्य वन श्रेणी में आती है और इसे किसी को भी लीज पर नहीं दिया जा सकता। इस अभियान के दौरान अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (राजस्व) वेदबर प्रधान उपस्थित रहकर संपूर्ण कार्य की निगरानी कर रहे थे। पुलिस एसडीपीओ दिव्यज्योति दलई तथा आईआईसी अर्जुन कहार सहित 100 से अधिक पुलिस बल तैनात किया गया था। मोटू तहसीलदार अर्जुन प्रधान के साथ मजिस्ट्रेट के रूप में डिप्टी कलेक्टर लिपिना दास, स्वयं राउत, सहायक जिला मजिस्ट्रेट अजय मांडांगी, हर महापात्र तथा कालिमेला तहसीलदार सत्य नारायण राजगुरु भी मौजूद थे।

इसके अतिरिक्त मेडिकल टीम, अग्निशमन अधिकारी कमल गौड़, ग्रामीण विकास विभाग के कनिष्ठ अभियंता प्रशांत कुमार बेहरा तथा टीपीएसओडीएल के कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित थे।
सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कानून के शासन की स्थापना की दिशा में मलकानगिरि प्रशासन का यह कदम एक सराहनीय पहल माना जा रहा है।

2024 में आया था यह लैंड जिहाद का मामला : पांचजन्य ने प्रसारित की थी अनेक रिपोर्टें
सन 2024 में मलकानगिरि जिले से यह चौंकाने वाला लैंड जिहाद का मामला सामने आया था जिसमें मोटू क्षेत्र में कई एकड़ वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण का आरोप लगा था । उस समय़ पांचजन्य ने इस संबंध में लगातार रिपोर्टें विस्तृत रुप से प्रसारित की थी । इस अतिक्रमित भूमि पर “इस्लाम नगर” नामक बस्ती बसाए जाने से स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठे थे यह घटना पूर्व बीजेडी सरकार के कार्यकाल के दौरान की बताई गई थी , जिससे संभावित मिलीभगत और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। उस समय कहा गया था कि इस्लाम नगर राष्ट्रीय राजमार्ग-326 से मात्र 2-3 किलोमीटर दूरी पर, साबेरी नदी के किनारे घने जंगलों के बीच अवैध रूप से बसाया गया है। यहां तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क बनाई गई और चारों ओर तारबंदी भी की गई।

यह आरोप लगा था कि इस क्षेत्र तक पहुंचने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत सरकारी धन का उपयोग कर सड़क निर्माण कराया गया। इस सड़क पर 9 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे । यह परियोजना 25 अप्रैल 2022 से शुरू हुई थी, और मौके पर लगे बोर्ड से इस पूरे मामले में अनियमितताओं के संकेत मिले थे। इससे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अधिकारियों तथा अतिक्रमणकारियों के बीच संभावित सांठगांठ पर गंभीर सवाल उठे थे ।
इस क्षेत्र में भवन निर्माण, सड़क निर्माण और बड़े-बड़े तालाबों की खुदाई राज्य सरकार के मत्स्य एवं कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत की गई थी । इस्लाम नगर में न केवल पक्के मकान बनाए गए हैं, बल्कि गोदाम भी निर्मित किए गए थे । इसके अलावा, बिजली विभाग द्वारा बड़े ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं, और इलाके में जेसीबी मशीन व ट्रैक्टर भी देखे गए थे। सिंचाई विभाग की योजनाओं के तहत लिफ्ट इरिगेशन परियोजनाएं भी यहां संचालित की गई थी । इन सभी निर्माण कार्यों में विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से धन का उपयोग होने से यह आशंका जताई गई थी है कि पूरा मामला प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत से संचालित हुआ हो सकता है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता व भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि यह पूरा प्रकरण बीजेडी सरकार के कार्यकाल में हुआ है । उनका कहना था कि इस्लाम नगर को वन भूमि पर अवैध कब्जा कर बसाया गया और इसमें सरकार की जानकारी व समर्थन शामिल था। उस दौरान सरकारी अधिकारियों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया था । स्थानीय तहसीलदार इस भूमि को संरक्षित वन बता रहे थे, जबकि वन विभाग के रेंजर इसे राजस्व वन बता रहे हैं। दोनों विभाग एक-दूसरे पर कार्रवाई की जिम्मेदारी डाल रहे थे , जिससे स्थिति और उलझती जा रही थी । उधर उस दौरान मोहम्मद मासूम खान को लेकर भी नए खुलासे हुए थे । उन पर बीजेडी शासनकाल में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के आरोप लगे थे । मनरेगा योजना के तहत इस्लाम नगर के लिए दो सड़कों का निर्माण कराया गया था । वहीं, वर्ष 2022-23 में मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की ओर से तालाब खुदाई के लिए अनुदान दिया गया, जिसमें उनके पिता इस्माइल खान को 3.74 लाख रुपये और स्वयं मासूम खान को 5.44 लाख रुपये मिले थे ।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री मत्स्य योजना के तहत वर्ष 2020-21 में 17 लाख रुपये की लागत से एक तालाब का निर्माण कराया गया, जिसमें सरकार द्वारा 6.80 लाख रुपये की सब्सिडी मासूम खान के भाई को दी गई थी । इस क्षेत्र में दो बड़े ट्रांसफार्मर भी स्थापित किए गए थे । इस मामले में मीडिया में खबरें आने के बाद 2024 नवंबर माह में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्वतः संज्ञान लिया था ।

Topics: Odisha NewsOdishaIslamnagar Demolished by BulldozersOdisha Land Jihad Newsillegal encroachment
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