तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) नीत एनडीए बड़ा राजनीतिक परिवर्तन करते हुए सरकार बनाने की ओर अग्रसर दिख रही है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन को टक्कर देने के लिए एनडीए पूरे दमखम से चुनावी मैदान में है। भाजपा नीत एनडीए को पड़ोसी केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी से भी एक विशेष राजनीतिक लाभ मिल रहा है।
रामचंद्रन को पुडुचेरी के बाद मिली तमिलनाडु की सत्ता
पुडुचेरी में भाजपा स्थानीय दल ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर पांच साल से सफलतापूर्वक सरकार का संचालन कर रही है। 2021 के पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके भी इस गठबंधन का हिस्सा थी और इस बार भी एआईएडीएमके इस गठबंधन का हिस्सा है। तमिलनाडु में पुडुचेरी की राजनीति का काफी असर होता है, 1972 में डीएमके से अलग होकर एम जी रामचंद्रन के नेतृत्व में चुनाव लड़कर एआईएडीएमके ने पहले पुडुचेरी में सरकार बनाई थी। फिर 1977 में इसी जीत के सन्देश के कारण ही तमिलनडु में बहुमत के साथ तमिलनाडु में सरकार बनी। एनडीए इस बार तमिलनाडु में 1977 के तर्ज पर चुनाव लड़कर डीएमके को सत्ता से बेदखल करने की ओर बढ़ती दिख रही है।
सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन में घमासान
दूसरी और सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन में आपसी घमासान है, सभी दल मजबूरी में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए गठबंधन को मजबूर हैं। तमिलनाडु में इस गठबंधन के दल एक-दूसरे की मदद के लिए कम बल्कि एक-दूसरे को निपटाने में ज्यादा लगे हैं। इसी तर्ज पर महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी नीत महा विकास अघाड़ी गठबंधन के घटक दल अपने सहयोगियों को निपटाने में लगे थे। डीएमके कांग्रेस पार्टी के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करती है और मंत्रिमंडल में स्थान नहीं देती है। इस बार भी डीएमके ने सरकार बनाने की स्थिति में कांग्रेस को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं देने का मन बनाया है। डीएमके, कांग्रेस के साथ केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की तरह ही आचरण कर रही हैं जहां गठबंधन के बावजूद उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया है।
कांग्रेस ने डीएमके से पूर्व अभिनेता विजय की पार्टी के साथ गठबंधन करने पर गहरा मंथन किया था मगर अंत में डीएमके के साथ ही गठबंधन किया। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव है और वे चुनाव में जिन सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार नहीं हैं उन पर गठबंधन से अलग अन्य उम्मीदवारों को भी मत दे सकते हैं ।
भाजपा का प्रदर्शन काफी अच्छा
2024 के लोकसभा चुनाव का आकलन करे तो पाते हैं कि भाजपा का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था। भाजपा ने 2024 में पीएमके और टीएमसी (मूपनार) सहित अन्य छोटे दलों के साथ चुनाव लड़ा था और गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था। भाजपा 59 विधानसभा की सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी। भाजपा 9 लोकसभा सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी और 11.24 प्रतिशत मत प्राप्त किया था। भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन से सबको चकित करते हुए बिना एआईएडीएमके या अन्य किसी बड़ी पार्टी के सहयोग के कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, कोयंबतूर वेल्लोर, चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई दक्षिण लोकसभा सीटों के सभी विधानसभा सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी। यह तमिलनाडु में बढ़ती स्वीकार्यता के साथ ही पड़ोसी प्रदेश पुडुचेरी में पार्टी द्वारा गठबंधन सरकार चलाने के कारण जनादेश है।
भाजपा और एआईएडीएमके ने बढ़ाया जनाधार
लोकसभा चुनाव में भाजपा और एआईएडीएमके अलग-अलग चुनाव लड़कर जनाधार को बड़ा कर चुकी हैं, जिसका फायदा विधानसभा चुनाव में मिलेगा। भाजपा और एआईएडीएमके विधानसभा चुनाव में एक दर्जन से अधिक दलों के साथ गठबंधन करके अपने जनाधार को पहले से भी बड़ा किया है। लोकसभा चुनाव में जहां डीएमके नीत गठबंधन को 46.97 प्रतिशत मत मिले थे, वहीं एनडीए और एआईएडीएमके गठबंधन को 41.33 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। वर्तमान का एआईएडीएमके और भाजपा नीत एनडीए गठबंधन सरकार बनाने की ओर अग्रसर है।

















