खाड़ी में चल रहे युद्ध के बीच भारत के पुराने मित्र रूस ने आश्वस्त किया है कि वो भारत की जरूरतों के अनुसार, तेल और एलएनजी की सप्लाई बढ़ाएगा। यह बात रूस के पहले डिप्टी चेयरमैन डेनिस मंटुरोव ने अपनी भारत यात्रा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए रूस एकदम तैयार है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि रूसी डिप्टी चेयरमैन मंटुरोव 2 से 3 अप्रैल 2026 तक भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल समेत कई बड़े अधिकारियों से मुलाकात की। रूसी दूतावास की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि मंटुरोव ने बताया कि रूसी कंपनियां भारतीय बाजार में तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की सप्लाई को लगातार बढ़ा सकती हैं।
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से ऊर्जा का संकट गहराया है। ऐसे में रूस भारत को ज्यादा तेल और एलएनजी देकर मदद करने को तैयार है। यह दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत बनाने का संकेत है।
खाद और यूरिया प्रोजेक्ट पर बात
मंटुरोव ने बताया कि 2025 के अंत तक रूस ने भारत को जरूरी मिनरल फर्टिलाइजर की सप्लाई 40 प्रतिशत बढ़ा दी थी। अब भी भारत की जरूरत के मुताबिक सप्लाई जारी रखने की तैयारी है। दोनों देश मिलकर यूरिया (कार्बामाइड) बनाने का एक संयुक्त प्रोजेक्ट चला रहे हैं, जिससे लंबे समय तक कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग जारी है। कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के नए यूनिट्स बनाने का काम तय समय के अनुसार चल रहा है। रूस और भारत ने इस पर फिर से अपनी प्रतिबद्धता जताई।
व्यापार, उद्योग और दूसरे क्षेत्र
मंटुरोव भारत-रूस इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन (IRIGC-TEC) के को-चेयर भी हैं। जयशंकर के साथ हुई बैठक में व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, खाद, कनेक्टिविटी, टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दिसंबर 2025 में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक समिट के फैसलों पर कितनी प्रगति हुई, इसकी समीक्षा भी की गई।
दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बात की, जिसमें वेस्ट एशिया (मिडिल ईस्ट) का संघर्ष शामिल था। उद्योग, स्पेस, शिक्षा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। रूस का कहना है कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं। मंटुरोव की यह यात्रा इसी दिशा में एक कदम है, जहां ऊर्जा सुरक्षा पर खास फोकस रहा। फिलहाल भारत को मिडिल ईस्ट संकट से होने वाले असर से बचाने के लिए रूस तेल और एलएनजी की ज्यादा सप्लाई पर तैयार दिख रहा है।

















