अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार मनमाने तरीके से देशों पर टैरिफ लगा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने गुरुवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है। अपने नए आदेश के तहत उन्होंने फार्मा और मेटल कंपनियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत उन्होंने पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
इसके साथ ही ट्रंप का यह आदेश उन फार्मा कंपनियों पर लागू होगा जो ट्रंप प्रशासन के साथ मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) प्राइसिंग डील नहीं करतीं। यह कदम ट्रंप के ‘लिबरेशन डे’ की पहली सालगिरह के मौके पर उठाया गया। प्रशासन का मकसद है कि दवा कंपनियां अपना उत्पादन अमेरिका में स्थापित करें और अमेरिकी लोगों को कम कीमत पर दवाएं मिलें।
मोस्ट फेवर्ड नेशन प्राइसिंग डील क्या है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका का MFN प्राइसिंग डील कंपनियों के साथ कीमतों को लेकर समझौता है। इसमें कंपनियां अमेरिकी मरीजों को उन दवाओं की कीमतें कम करके देती हैं जो दूसरे देशों में सबसे कम होती हैं। अभी तक प्रशासन ने बड़ी दवा कंपनियों के साथ 17 समझौते किए हैं, जिनमें से 13 साइन हो चुके हैं। जिन कंपनियों ने यह डील साइन कर ली है और जो अमेरिका में पेटेंट दवाओं व उनके इंग्रीडिएंट्स का प्रोडक्शन करने के लिए फैक्ट्री बना रही हैं, उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
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टैरिफ के नियम
जिन कंपनियों ने MFN प्राइसिंग डील नहीं की, उनकी कुछ पेटेंटेड दवाओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लग सकता है। अगर कंपनियां डील नहीं करतीं लेकिन अमेरिका में उत्पादन फैसिलिटी लगा रही हैं, तो उन पर शुरू में 20 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। यह 4 साल में बढ़कर 100 प्रतिशत तक हो सकता है। ट्रंप प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि कंपनियों को 100 प्रतिशत टैरिफ लगने से पहले बातचीत करने का समय मिलेगा। बड़ी कंपनियों को 120 दिन और बाकी कंपनियों को 180 दिन का समय दिया गया है।
धातु आयात पर भी सख्ती
इस कार्यकारी ऑर्डर में सिर्फ दवाएं ही नहीं, मेटल इंपोर्ट के नियम भी कड़े किए गए हैं। आयातित स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहेगा। उन उत्पादों पर जहां धातु का हिस्सा ज्यादा है, पूरी कीमत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। अगर किसी उत्पाद में धातु का हिस्सा उसके कुल वजन के 15 प्रतिशत से कम है, तो सिर्फ देश-विशेष टैरिफ ही लागू होंगे।
क्या है ट्रंप प्रशासन का असली उद्देश्य
ट्रंप प्रशासन इस पूरे कदम से दवा कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने और कीमतें कम करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है। अमेरिका में दवाओं की कीमतें दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा होने की शिकायत लंबे समय से रही है। इस पॉलिसी से कंपनियां या तो डील करेंगी या अमेरिका में फैक्ट्री लगाएंगी, ताकि टैरिफ से बच सकें। यह घोषणा दवा उद्योग पर असर डालने वाली है क्योंकि कई बड़ी कंपनियां अभी भी अपना बड़ा उत्पादन बाहर रखती हैं।














