असम में भाजपा नीत एनडीए सरकार लगातार दो कार्यकाल के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए पहले से बड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम और पूर्वोत्तर राज्यों को ज्यादा प्राथमिकता दी है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों को अष्टलक्ष्मी की संज्ञा दी है। प्रधानमंत्री 77 बार असम का दौरा कर चुके हैं। जबकि उनके पहले के डॉ. मनमोहन सिंह ने इतने ही समय में सिर्फ 10 बार दौरा किया था। डॉ. मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा सांसद होने के बावजूद भी बड़े पैमाने पर असम की अनदेखी की थी।
आधारभूत संरचना के क्षेत्र में ना सिर्फ असम बल्कि, पूरे पूर्वोत्तर भारत में बड़े बदलाव हुए हैं। कांग्रेस पार्टी ने कभी भी इस इलाके को प्राथमिकता नहीं दिया, क्योंकि यह राजनीतिक रूप से उतना फ़ायदेमंद नहीं है। यूपीए सरकार की तुलना में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राज्य का रेलवे बजट पांच गुना बढ़ाया गया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर कई पुलों का निर्माण किया गया है, जिससे असम का पर्याप्त विकास हुआ है और राज्य के लोगों को सुविधा मिल रही है। पहले असम में सिर्फ़ छह मेडिकल कॉलेज थे जो अब बढ़कर 15 हो गए हैं। इसके साथ ही छह मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं और 10 की योजना तैयार की जा रही है।
असम में आई शांति
हिमंत विश्व शर्मा सरकार ने सुरक्षा के मामले में भी काफी काम किया है। असम हिंसा और आतंक से परेशान था और यहाँ के आमजन अपनी और अपने परिवार वालों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे। लेकिन, भाजपा नीत केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने बोडो समझौता करने के साथ ही सभी समूहों और समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए कई समझौते किए हैं। इन समझौतों के नतीजतन हज़ारों आतंकवादियों ने हथियार छोड़ा है। जिससे राज्य शांति और सुकून की के साथ तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। इन समझौतों और पिछले कुछ सालों में डबल इंजन सरकार की कोशिशों की वजह से असम देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य बन गया है। असम की औसत सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से लगभग 50% ज्यादा है।
अन्य राज्यों के लिए पथ प्रदर्शक बना असम
असम सरकार के द्वारा समाज कल्याण के लिए गए कदम अन्य राज्यों के लिए पथप्रदर्शक की तरह है। बाल विवाह पर रोक लगाने और ज़मीन पर कब्ज़ा हटाने के लिए सख़्त कानून बनाकर असम सरकार ने स्थानीय निवासियों के हित के लिए बड़ा कदम उठाया है। असम में पिछली कांग्रेस सरकारों को बाल विवाह से कोई दिक्कत नहीं थी, जो कि संविधान के खिलाफ है। कुछ समुदायों में बाल विवाह का चलन ज्यादा है। कांग्रेस पार्टी ने अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इस मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस ने अपने वोट बैंक की राजनीति के तहत ही ज़मीन हड़पने वालों का साथ दिया, मगर मौजूदा सरकार ज़मीन हड़पने को लेकर बहुत सख्त है और जमीन हड़पने वालों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई कर रही है। अधिकतर ऐसे लोग अवैध बांग्लादेशी हैं अतएव उन्हें देश निकाला भी किया जा रहा हैं। राज्य की सख्त कानून व्यवस्था के कारण लाखों एकड़ जमीन खाली कराई जा चुकी है।
घुसपैठ ने बदली डेमोग्राफी
गैरकानूनी घुसपैठ की वजह से असम की जनसांख्यिकी बदल गई है और पिछली 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की 34.22 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है। वर्तमान में यह अनुमानों के अनुसार 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। असम एक मुख्यमंत्री के अनुसार 2041 तक असम में मुस्लिम हिन्दुओं को आबादी में पीछे छोड़ देंगे। मुस्लिमों की आबादी वृद्धि में बांग्लादेशियों का अवैध प्रवेश है। जिसको कांग्रेस पार्टी और उसके विचारधारा के लोगों द्वारा गुपचुप समर्थन मिलता है। पिछली कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने वोट बैंक राजनीति के कारण सात दशकों से ज़्यादा समय तक गैरकानूनी प्रवेश को बढ़ावा दिया था जिस पर अब लगाम लगाया गया है। साथ ही अब भाजपा नीत एनडीए सरकार इन अवैध बांग्लादेशियों को सख्ती करके बाहर का रास्ता दिखा रहा है।

















