खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के करीब एक माह हो चुके हैं। अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान हमले कर रहे हैं, लेकिन फिर भी जीत दूर-दूर तक नसीब नहीं होती दिख रही है। डोनाल्ड चाहे कुछ भी दावे करें कि उन्होंने इस्लामिक मुल्क को बर्बाद कर दिया है, लेकिन हकीकत ये है कि ईरान अभी भी पलटवार कर रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि क्या अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिक उतारेगा? इस सवाल पर रोक लगाते हुए अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 3500 से ज्यादा सैनिकों को उतार दिया है। ये सभी यूएसएस त्रिपोली पर तैनात हैं।
क्या है यूएसएस ट्रिपोली
यूएसएस ट्रिपोली एक बड़ा एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, जो जापान से करीब दो हफ्ते पहले रवाना हुआ था। अब ये अपने ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है। इस पर लगभग 2500 मरीन्स सवार हैं। जहाज एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स और ओस्प्रे हेलिकॉप्टर चलाने में सक्षम है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसकी पुष्टि की है। इसके अलावा, सैन डिएगो से यूएसएस बॉक्सर और दूसरे नौसेना के जहाज भी इस क्षेत्र की ओर भेजे जा रहे हैं। ये तैनाती पहले से मिडिल ईस्ट में मौजूद करीब 50,000 अमेरिकी सैनिकों के अलावा है।
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ये अलग बात है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में कभी जीमीनी सैनिक भेजने की बात करते हैं और कभी नहीं भेजने की बात करते हैं। लेकिन उनकी इन गोलमोल बातों के बीच एक बात अब साफ होती दिख रही है कि अमेरिका ईऱान में अपने सैनिक उतार सकता है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ईरान के खिलाफ लॉन्च किया था। इसके तहत अब तक 11,000 ज्यादा टारगेट्स पर हमले किए जा चुके हैं। ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन्स दागे थे। इसके जवाब में ये कार्रवाई बढ़ी है। अहम बात ये है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण रखता है। इस वजह से वैश्विक तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है और तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। यमन के ईरान समर्थित हूती गुट ने इजरायल की ओर मिसाइल दागने की जिम्मेदारी ली है। इससे बाब एल-मंदेब स्ट्रेट जैसे समुद्री रास्तों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

















