मिडिल ईस्ट में करीब एक महीने से भीषण संघर्ष चल रहा है। अमेरिका और इजरायल ईरान पर मिसाइल हमले कर रहे हैं। जबाव में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे कच्चे तेल के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत भी खाड़ी देशों से इसी रास्ते से तेल आयात करता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका खुलासा किया है कि ऐसा कैसे संभव हुआ।
प्रधानमंत्री ने बीते दिन शनिवार को उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान बताया कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद देश में ईंधन की सप्लाई सुचारू है और आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि हम भी युद्ध प्रभावित इलाकों से ईंधन आयात करते हैं, लेकिन सरकार पहले से इसके लिए तैयार थी।
एथेनॉल मिश्रण से मिली राहत
उन्होंने इसका कारण एथेनॉल ब्लेंडिंग को बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति न होती तो भारत को हर साल अतिरिक्त 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता, जो करीब 700 करोड़ लीटर के बराबर है। पिछले एक दशक में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर करीब 20 प्रतिशत हो गई है। भारत ने 2025 में ही E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो समय से पहले हुआ।
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इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है। एथेनॉल उत्पादन क्षमता अब करीब 2,000 करोड़ लीटर है, जिसमें से 1,000 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। इस पहल से लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
किसानों की आमदनी भी बढ़ी
पीएम मोदी ने किसानों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि एथेनॉल बनाने के लिए गन्ना और दूसरे फसलों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ी है। जेवर के आसपास गन्ना उत्पादक इलाके हैं, जहां से एथेनॉल के लिए कच्चा माल आसानी से मिलता है। किसानों के प्रयासों से ही इस वैश्विक संकट में देश को बड़ी मदद मिली है।
विद्युतीकरण से डीजल की बचत
रेलवे के विद्युतीकरण से हर साल करीब 180 करोड़ लीटर डीजल बच रहा है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ईंधन की खपत कम हुई है। इन सब उपायों से कच्चे तेल पर निर्भरता घटाई गई है। सरकार ने हाल ही में पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार के पास दो विकल्प थे—या तो कीमतें बहुत बढ़ानी पड़तीं, या फिर अपना नुकसान उठाकर आम लोगों को बचाना। प्रधानमंत्री मोदी के फैसले से तेल कंपनियों के नुकसान को कम किया गया, लेकिन पंप पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं।
गौरतलब है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 40 प्रतिशत आयात होता है, फिर भी सप्लाई बनी हुई है। रणनीतिक भंडारण बढ़ाया जा रहा है—वर्तमान में 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा रिजर्व है और और 6.5 मिलियन टन का काम चल रहा है।

















