भारत में कथित सेक्युलर्स का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है, जिसके लिए अब भारत माता की जय बोलना भी भड़काऊ हो गया है। क्या किसी भी देश के नागरिक का अपने देश के पक्ष में नारा लगाना कहीं से भी किसी के लिए भड़काऊ हो सकता है? क्या किसी भी समारोह में भारत माता की जय का उद्घोष ऐसा हो सकता है कि जिससे किसी की भावनाएं आहत हों? यह एक ऐसा प्रश्न है, जिसे हर कोई पूछ सकता है?
यह भी एक प्रश्न है कि कथित फेमिनिस्ट औरतों को भारत माता से क्या समस्या है? उन्हें स्त्री शक्ति से घृणा क्यों है?
क्या है मामला?
इन दिनों फिल्म धुरंधर 2 चर्चा में है और उसके कलाकार भी चर्चा में हैं। आदित्य धर से लेकर अर्जुन रामपाल तक सभी चर्चा में हैं। उनकी एक-एक बात पर बहसें हो रही हैं। धुरंधर फिल्म में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का चरित्र निभाया है और उसमें उनका एक डायलॉग भी है, जिसमें वे पाकिस्तान ज़िन्दाबाद जैसा कुछ कह रहे हैं। अर्जुन रामपाल ने हाल ही में मुंबई में एक अवार्ड समारोह में बहुत ही भावुक होकर 26 नवंबर को मुंबई में ताज होटल पर हुए आतंकी हमले के विषय में बहुत भावुक होकर टिप्पणी की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे उनका जन्मदिन उसी दिन पड़ता है और वे उस रात अपना जन्मदिन उसी होटल में मनाने जा रहे थे और वे अपने दोस्त को लेने जा आ रहे थे। वे ताज के रास्ते में ही थे कि जब उन्हें यह पता चला था कि मुंबई पर हमला हो गया है।
वे उस क्षण को याद करके भावुक हो गए थे। अर्जुन रामपाल ने कहा कि वे उस रात को नहीं भूल सकते हैं और वे जिस बार में थे, वहीं पर उन्हें एक सूइट दे दिया गया था। जब अगली सुबह वे घर के लिए निकले तो उन्होंने तीन जगहों पर अपनी गाड़ी रोकी। अर्जुन रामपाल का कहना था कि जब आदित्य धर ने उन्हें धुरंधर फिल्म का प्रस्ताव दिया, तो उन्हें लगा कि यही तरीका है बदला लेने का।
और उसके बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने फिल्म में भारत को काफी कुछ कहा है, मगर वे देश से प्यार करने वाले हैं और फिर अंत में उन्होंने “भारत माता की जय” कहा।
छद्म सेक्युलर शोभा डे को भारत माता से दिक्कत
इस बात को लेकर कथित फेमिनिस्ट और सेक्युलर शोभा डे भड़की हुई हैं। द प्रिन्ट में उन्होनें बाकायदा एक विस्तृत लेख लिखा है कि क्यों अर्जुन रामपाल का एक अवॉर्ड फ़ंक्शन में भारत माता की जय बोलना बॉलीवुड के दर्शकों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। शोभा डे के अनुसार उस अवार्ड फ़ंक्शन में कई लोग ऐसे थे, जिन्होनें धुरंधर जैसी “हाइपर नेशनलिस्ट” फिल्मों में काम किया है। और श्रोताओ में कई भाजपा समर्थक थे और अन्य राजनीतिक पृष्ठभूमि के शोबिज देशभक्त थे, जैसे कि अनुपम खेर और रवीना टंडन आदि।
शोभा डे लिखती हैं कि एक सुहानी शाम में बाद में एहसास हुआ कि कैसे बॉलीवुड का हिन्दुत्व का एजेंडा हम पर छाने लगा है। शोभा डे को शिकायत है कि सक्षम फिल्मनिर्माता जो लोगों को प्रभावित करने में सक्षम है और जो एक सीधी प्रोपेगैंडा फिल्म के स्थान पर अधिक प्रभावी रूप से प्रभावित कर सकते हैं, वे लोग भी राजनीतिक मायथोलॉजी और प्रोपेगैंडा को एक शानदार स्टोरीटेलिंग के साथ कहानियों को जनता के सामने ला रहे हैं।
बॉलीवुड पर दक्षिणपंथ हावी हो रहा-शोभा डे
शोभा डे को समस्या है कि बॉलीवुड पर दक्षिणपंथ हावी हो रहा है। वैसे तो राइट विंग या दक्षिणपंथ जैसा कोई शब्द होता ही नहीं है।
शोभा डे लिखती हैं कि गदर 2, कश्मीर फाइल्स, केरल स्टोरी जैसी फिल्मों की सफलता यह बताती है कि कैसे बॉलीवुड में फिल्में बनाने के विषय बदल रहे हैं। पाकिस्तान और पाकिस्तानियों को नीचा दिखाना, और पाकिस्तान को दुनिया में सबसे बड़ा आतंकी देश घोषित करना भारत की जनता को खुश कर रहा है। शोभा डे को समस्या हो रही है कि भारत के दुश्मन पर मुक्के बरसाते हुए भारतीय नायकों को आम लोग सराह रहे हैं। और वे लिखती हैं कि देशभक्ति और भारत के लिए प्यार के नाम पर वीभत्सता को दिखाया जा रहा है।
पाकिस्तान से कथित सेक्युलरवादियों को इतना प्यार क्यों है?
यह बहुत हैरानी की बात है कि जिस पाकिस्तान ने भारत को नीचा दिखाने में, भारत की आत्मा को बार-बार छलनी करने में कभी भी कोई भी कसर नहीं छोड़ी, उस पाकिस्तान से कथित सेक्युलरवादियों को इस सीमा तक प्रेम है। भारत माता की जय हिंदुत्ववादी कैसे हो गया? जिस भारत माता के लिए लाखों लोगों ने अपने प्राण बलिदान हँसते हँसते कर दिए थे, अब वही नारा भड़काऊ हो गया?
भारत माता की रक्षा के लिए आज भी लाखों लोग अपने प्राणों का बलिदान करने के लिए तैयार हो जाएंगे, और देश के लिए यह भावना हिन्दुत्व वादी कैसे हो गई? क्या शोभा डे जैसे लोग यह साबित करना चाहते हैं कि माता की अवधारणा केवल हिन्दुत्व में है? ये वही लोग हैं, जिन्हें फिल्मों में पाकिस्तान प्रेम दिखाने में कोई समस्या नहीं होती है। इन लोगों को इस बात से कोई समस्या नहीं होती जब शाहरुख खान की फिल्म “मैं हूँ न” में एक फौजी को आतंकवादी दिखा दिया जाता है और वह भी भारत और पाकिस्तान की कथित शांति के कदमों के खिलाफ।
बजरंगी भाईजान में कबीर खान ने केवल अपने राजनीतिक दुराग्रह के चलते ही चिकन वाला गाना डाला था और उन्होनें इसे स्पष्ट कहा भी था। उन्होनें कहा था कि ““बजरंगी भाईजान में जो चिकन वाला गाना था, वह इसलिए लोकप्रिय हुआ क्योंकि उसमें करीना और सलमान ने बहुत अच्छा डांस किया था, परन्तु वही सबसे ज्यादा राजनीतिक था क्योंक वह बीफ बैन के समय आया था। यह गाना मूलत: यह कहता है कि यह चौधरी ढाबा है, जो भारत का प्रतीक है, जिसमें आधा मेन्यु शाकाहारी है और आधा मांसाहारी, तो जो आपको खाना है वह साथ बैठकर खाइए और जाइए! यही आपको राजनीति में होना चाहिए!””
पठान जैसी फिल्में इन कथित सेक्युलर लोगों को पसंद आती हैं, परंतु भारत माता की जय का नारा भड़काऊ लगता है। पाकिस्तान को भला दिखाने वाली फिल्मों को यह वर्ग पसंद करता है, जबकि पाकिस्तान द्वारा बारबार भारत की आत्मा पर घाव पर यह चुप बैठ जाता है। परंतु प्रश्न यही है कि “भारत माता की जय” नारे में क्या भड़काऊ है? कि जिसे लेकर शोभा डे को एक लेख लिखना पड़ गया!

















