असम में अवैध घुसपैठ का आकलन करें तो पाते हैं कि यह कांग्रेस पार्टी प्रायोजित समस्या है। राज्य में अवैध घुसपैठ में कांग्रेस पार्टी की बेहद दिलचस्पी रही है, क्योंकि उसके अपने राजनीतिक स्वार्थ इसमें निहित थे। असम में अवैध घुसपैठ सबसे अधिक मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के कार्यकाल में दर्ज़ की गई थी। इसमें कांग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी की भी मौन सहमति थी या यों कहें कि सोनिया गाँधी के इशारे पर घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा था। कांग्रेस पार्टी की योजना असम के रास्ते भारत में अवैध बांग्लादेशियों को प्रवेश करवाकर पूरे देश में फैलाना था। असम में अवैध घुसपैठ की समस्या और भी विकराल होती अगर असम गण परिषद की सरकार असम में नहीं बनी होती। असम में दो बार 1985-90 और 1996-2001 में असम गण परिषद के प्रफुल्ल कुमार महंता मुख्यमंत्री बने थे और मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि के आंकड़ों के अनुसार उनके समयकाल में अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाया गया था।
तरुण गोगोई के कार्यकाल में सबसे अधिक हुई घुसपैठ
असम में अवैध घुसपैठ सबसे अधिक तरुण गगोई के 2001 के बाद मुख्यमंत्री बनने के बाद ही हुआ है। असम में अवैध घुसपैठ के मार्फत कांग्रेस पार्टी अपनी वोट बैंक को मजबूत कर रही थी। इस वोट बैंक के सहयोग की बदौलत कांग्रेस पार्टी राज्य में लगातार तीन बार 2001, 2006 और 2011 में सरकार बनाने के कामयाब भी हुई थी। मगर 2016 में भाजपा, असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट सहित कुछ अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर असम की जनता का ध्यान दिनों दिन बढ़ती घुसपैठ की समस्या की ओर आकृष्ट करते हुए कांग्रेस पार्टी को चुनावी शिकस्त दिया था। वर्तमान असम चुनाव में भी ये तीनों दल फिर एक बार कांग्रेस पार्टी गठबंधन और बदरुद्दीन अजमल की आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से दो-दो हाथ कर रहे हैं।

2001-11 के दौरान असम में मुसलमानों की तुलनात्मक बढ़ोतरी बहुत ज़्यादा रही है। इस दशक में राज्य की आबादी में मुसलमानों का हिस्सा 3.31 प्रतिशत बढ़ी थी। यह किसी भी राज्य के लिए मुसलमानों के हिस्से में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी है। यह आज़ादी के बाद किसी भी दशक में असम में मुसलमानों के हिस्से में देखी गई सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी भी है। यह भी एक राजनितिक संयोग ही हैं कि 2001 में ही तरुण गोगोई पहली बार असम के मुख्यमंत्री बने और यह समस्या और भी विकराल होती गई।
असम में तरुण गोगोई के शासनकाल के पहले दशक में मुस्लिम की जनसंख्या की वृद्धि दर 29.6 प्रतिशत रही वहीं हिंदुओं के वृद्धि दर 10.9 प्रतिशत थी। इस दशक में सहित मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि दर हिन्दुओं के अपेक्षा 2.7 गुना अधिक थी। इस दशक में मुसलमानों की जनसंख्या की वृद्धि दर बढ़ी, जबकि हिन्दुओं की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज़ किया गया था। इससे हिंदुओं और मुसलमानों की वृद्धि दर के बीच का अंतर और बढ़ गया था। इस दशक में ईसाइयों की वृद्धि दर भी पिछले दशक के मुकाबले कम हुई।

इस दशक में हिंदुओं से ज़्यादा मुसलमान जुड़े हैं। मुसलमानों की तेज़ी से बढ़ोतरी की वजह से, 2001-11 के दौरान उनकी संख्या में बढ़ोतरी दूसरों की तुलना में बहुत ज़्यादा हुई थी। इस दशक में असम में 45.5 लाख नए जुड़े, जिनमें 24.4 लाख मुसलमान थे। वहीं सिर्फ़ 18.8 लाख हिंदू जुड़े थे। दूसरे तरीके से देखें तो, 2001-2011 में आबादी में जुड़े हर 100 लोगों में से 54 मुसलमान और 41 हिंदू थे।

















