पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव के कारण कई जिलों खासकर सीमावर्ती जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक होने की स्थिति में हैं। इससे आने वाले चुनावों में गैर मुस्लिमों या यूं कहें कि हिंदू उम्मीदवारों के लिए चुनाव जीतना दुष्कर होता जाएगा। वहीं, भाजपा ने भी अपने चुनाव अभियान में काफी परिवर्तन लाते हुए अपनी रणनीति में आमूलचूल बदलाव किया है। भाजपा बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, बंगाल-केंद्रित मुद्दों को आगे बढ़ाने और विशेष गहन पुनरीक्षण के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध करने पर जोर देकर जनता को इन मुद्दों पर अपनी ओर कर रही है। इसका असर जमीन पर दिख रहा है।
जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध घुसपैठ पर सियासी मुकाबला तय करेगा चुनावी दिशा
पश्चिम बंगाल के लिए 2026 का विधानसभा चुनाव जनसांख्यिकीय पर एक निर्णायक अवसर की तरह भी है। अभी जनगणना नहीं हुई है मगर ममता बनर्जी कह रही हैं कि राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 33 प्रतिशत है, जबकि यह इससे अधिक भी हो सकती हैं। आने वाले समय में अगर घुसपैठ इसी तरह जारी रही तो मुस्लिम जनसंख्या और भी तेजी से बढ़ेगी। फिर आने वाले चुनावों में में गैर मुस्लिमों के लिए चुनाव जीतना और भी मुश्किल हो जायेगा। भविष्य में राज्य की चुनावी दिशा तय करने में बंगाली हिंदू अहम भूमिका निभाएं, इसके लिए यह ज़रूरी है कि इस बार राज्य में BJP की सरकार आए और जल्द से जल्द राज्य से गैर-कानूनी घुसपैठियों को बाहर निकाले।
सीमांचल मॉडल और बदली सियासी रणनीति से बंगाल में नई हलचल
पश्चिम बंगाल में जनसांख्यिकी में परिवर्तन का असर दिख रहा है। अब भाजपा को छोड़कर तमाम दल हिंदुओं के बदले मुसलमानों को उम्मीदवार बना रहे हैं। असदुद्दीन ओवैसी इन परिस्थितियों में अपनी राजनीति को नई चमक देने में जुटे हैं। ओवैसी बिहार के सीमांचल में 2020 और 2025 में उम्मीद से भी अच्छा प्रदर्शन करने के कारण पश्चिम बंगाल में इसी उम्मीद से पहुंच गए हैं। सीमांचल का इलाका बांग्लादेश सीमा के करीब है। इस इलाके में भी घुसपैठियों की संख्या काफी अधिक है। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह इस इलाके का दौरा करके लौटे हैं।
सीमावर्ती जनसांख्यिकी बदलाव और चुनावी राजनीति का मुद्दा
अवैध घुसपैठ के कारण बेतहाशा बढ़ती मुस्लिम जनसंख्या के कारण मुस्लिम तुष्टीकरण की मांग दिखने लगी है और आनेवाले समय में तमाम तथाकथित सेक्युलर दलों द्वारा उनकी मांग को बढ़-चढ़कर पूरा किया जाएगा। प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यिकी में बदलाव राज्य की राजनीति को प्रभावित कर रहा है। भाजपा इसी मुद्दे को 2026 चुनाव के लिए प्रचार अभियान का प्रमुख विषय बना रही है। राज्य की लगभग एक-तिहाई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव है। मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ मतदान करते हैं, इसलिए यह भाजपा के लिए एक संरचनात्मक चुनौती भी है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह चुनाव सिर्फ बंगाली हिंदुओं को बचाने का नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल को पाकिस्तान और बांग्लादेश बनने से रोकने का है।
कांग्रेस पार्टी , वाम दल, हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी सहित अन्य छोटे-छोटे दलों का चुनाव बाद भाजपा को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में आना तय है, इसलिए यह चुनाव भाजपा बनाम अन्य सभी दलों का है।

















