देहरादून वर्कशॉप का बड़ा फैसला: अब सैटेलाइट से होगी जंगलों की निगरानी, बदल जाएगी फॉरेस्ट पॉलिसी
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देहरादून वर्कशॉप का बड़ा फैसला: अब सैटेलाइट से होगी जंगलों की निगरानी, बदल जाएगी फॉरेस्ट पॉलिसी

कार्यशाला में चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया: सतत संसाधन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था और सामुदायिक एकीकरण; वन-आधारित उद्योग और उभरते जैव-आधारित उत्पाद; वन जैव-अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन शमन; तथा वन और वन्यजीव-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
Mar 23, 2026, 10:36 am IST
in उत्तराखंड
कार्यक्रम

कार्यक्रम

ICFRE, देहरादून में “सस्टेनेबल फॉरेस्ट-बेस्ड बायो-इकोनॉमी को बढ़ावा देना: मुद्दे और चुनौतियाँ” पर नेशनल वर्कशॉप खत्म हुई। इसमें नेशनल फॉरेस्ट्री प्रोग्राम में सैटेलाइट-बेस्ड फॉरेस्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को शामिल करने पर ज़ोर दिया गया, ताकि रियल-टाइम, सबूतों के आधार पर फैसले लिए जा सकें।

सतत वन जैव-अर्थव्यवस्था: प्रमुख विषय और चुनौतियाँ

कार्यशाला में चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया: सतत संसाधन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था और सामुदायिक एकीकरण; वन-आधारित उद्योग और उभरते जैव-आधारित उत्पाद; वन जैव-अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन शमन; तथा वन और वन्यजीव-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था। सतत वन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने: मुद्दे और चुनौतियाँ” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला ICFRE, देहरादून में संपन्न हुई, जिसमें नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि और पेशेवर एक साथ शामिल हुए। कार्यशाला में चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया: सतत संसाधन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था और सामुदायिक एकीकरण; वन-आधारित उद्योग और उभरते जैव-आधारित उत्पाद; वन जैव-अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन शमन; तथा वन और वन्यजीव-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था।

वन संरक्षण में तकनीक और समग्र दृष्टिकोण पर जोर

इस नेशनल वर्कशॉप में, एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज मिनिस्टर भूपेंद्र यादव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नेचर सबसे ज़रूरी है और इंसान के ज़िंदा रहने के लिए इसके साथ रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना ही नहीं है, बल्कि इसमें पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी शामिल है। एक मुख्य सुझाव में राष्ट्रीय वानिकी कार्यक्रमों में उपग्रह-आधारित वन निगरानी प्रणालियों को शामिल करने पर ज़ोर दिया गया, ताकि वास्तविक समय में, साक्ष्य-आधारित निर्णय लिए जा सकें। निगरानी, पारदर्शिता और अनुकूलनीय प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए रिमोट सेंसिंग, AI/ML उपकरणों और ज़मीनी स्तर के डेटा को मिलाकर एक एकीकृत भू-स्थानिक ढाँचा विकसित करने का सुझाव दिया गया।

आजीविका को बढ़ावा

कार्यशाला में संरक्षण और आजीविका सृजन में समुदाय-आधारित दृष्टिकोणों के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया। इसमें प्रोत्साहन-आधारित संरक्षण मॉडलों और वन्यजीवों से जुड़ी आजीविका के साधनों—जैसे कि इको-टूरिज़्म, प्रकृति-आधारित उद्यम और वन्यजीव-अनुकूल कृषि—को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई। उम्मीद है कि ये दृष्टिकोण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देंगे, मानव-वन्यजीव संघर्षों को कम करेंगे और स्थानीय समुदायों के लिए आय के अवसरों में वृद्धि करेंगे। कार्यशाला का समापन इस आम सहमति के साथ हुआ कि एक सतत वन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी, संस्थाओं और सामुदायिक भागीदारी के स्तर पर एकीकृत प्रयासों की आवश्यकता है।

Topics: Remote sensing forest managementCommunity based forest conservationForest based livelihoods IndiaClimate change and forests IndiaEco tourism and forest economyICFRE Dehradun workshopWildlife friendly agriculture IndiaSustainable forest bioeconomy IndiaSatellite based forest monitoring systemForest conservation India 2026Bhupender Yadav forest policyAI in forest monitoring
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