भारतीय सेनाओं की सतर्कता के कारण आम भारतीय शांति से अपना जीवन जी पा रहा है। ये बात संसदीय समिति की रिपोर्ट से साफ हो गया है। संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति को केंद्रीय गृह मंत्रालय तरफ से जानकारी दी गई है कि उसके मुताबिक पिछले पांच सालों में भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर रोजाना औसतन दो से तीन ड्रोन दिखाई देते रहे हैं। साथ ही, हर दिन कम से कम एक ड्रोन घुसपैठ की घटना भी रिपोर्ट हुई है।
क्या है पूरा मामला
द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 के अनुदानों की मांगों पर आधारित गृह मामलों की स्थाई समिति की 257वीं रिपोर्ट को 17 मार्च 2026 को संसद में पेश किया गया था। इसी में इन बातों का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन पांच सालों में कुल 4,323 ड्रोन देखे जाने की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 967 ड्रोन घुसपैठ वाले मामलों को रोका गया या नष्ट किया गया। इसके अलावा इन रोके गए या नष्ट किए गए ड्रोन से काफी सामान बरामद हुआ है। कुल 710 गोले-बारूद, 75 हथियार और 641 किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए। ज्यादातर ये घटनाएं पाकिस्तान से लगी पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमाओं पर हुई हैं। वहां ड्रोन दिखना आम बात बन चुकी है।
सुरक्षा बल कठिन परिस्थितियों में कर रहे काम
इसके अनुसार, सीमा पर सुरक्षा बलों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पहाड़ी इलाके, घने जंगल, नदी-नाले वाले इलाके, जहां बाड़ नहीं बनी है, और गांव सीमा के बहुत करीब बसे हुए हैं—ये सब काम को मुश्किल बनाते हैं। मौसम भी साथ नहीं देता। कोहरा, तेज बारिश, गर्मी या सर्दी—सब कुछ दृश्यता, आवाजाही और संचार पर असर डालता है।
इन हालात में सुरक्षा बल बॉर्डर आउट पोस्ट पर तैनात रहते हैं, नियमित गश्त करते हैं, अस्थायी बेस बनाते हैं। वे नाइट विजन डिवाइस, हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर, लंबी दूरी के ऑब्जर्वेशन सिस्टम, सैटेलाइट इमेजरी, वॉच टावर, यूएवी और स्मार्ट फेंसिंग के पायलट प्रोजेक्ट का इस्तेमाल करते हैं। फिर भी, कुछ जगहों पर सड़कें कम हैं, बिजली की समस्या है और सामान पहुंचाने के लिए हवाई या खच्चरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जम्मू कश्मीर में बनाए गए हैं 9,663 बंकर
गृह मंत्रालय ने समिति को बताया कि जम्मू-कश्मीर के बॉर्डर इलाकों में नागरिकों की सुरक्षा के लिए 9,663 बंकर बनाए गए हैं। इन पर 357.40 करोड़ रुपये खर्च हुए। ये बंकर सीमा पार से होने वाली गोलीबारी या शेलिंग के समय लोगों को बचाने के काम आते हैं।
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बॉर्डर जिलों में शेलिंग की घटनाएं बढ़ीं। इसके चलते 2,060 घरों को हुए नुकसान के लिए अतिरिक्त फंड मंजूर किए गए। घरों और संपत्ति के नुकसान पर मौजूदा नियमों के अनुसार मुआवजा भी दिया जा रहा है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि ड्रोन रोधी क्षमताओं को और मजबूत किया जाए। इसमें डिटेक्शन, न्यूट्रलाइजेशन और फॉरेंसिक एनालिसिस की बेहतर तकनीक लाई जाए। साथ ही, अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए।














