डूम-स्क्रॉलिंग आज के समय की एक आम लेकिन नुकसानदायक आदत बन गई है। दिनभर की थकान के बाद जब हम रात को आराम करने के लिए बिस्तर पर जाते हैं, तो हमारा शरीर नींद चाहता है। लेकिन हम में से कई लोग “बस 5 मिनट” सोचकर फोन उठाते हैं और फिर घंटों तक सोशल मीडिया या न्यूज देखते रहते हैं। यही आदत धीरे-धीरे हमारी नींद और मानसिक स्वास्थ्य को खराब करने लगती है।
हमारे शरीर की एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं। यह हमें सही समय पर सोने और जागने में मदद करती है। जब रात होती है, तो शरीर मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है, जिससे नींद आने लगती है। लेकिन फोन की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट इस प्रक्रिया को रोक देती है। इससे दिमाग को लगता है कि अभी दिन है और नींद आने में देरी होती है।
डूम-स्क्रॉलिंग का एक और नुकसान यह है कि यह दिमाग को शांत नहीं होने देती। सोने से पहले हमें रिलैक्स होना चाहिए, लेकिन फोन पर देखी जाने वाली खबरें, वीडियो या पोस्ट हमारे दिमाग को और ज्यादा सक्रिय कर देती हैं। खासकर नकारात्मक खबरें देखने से मन में चिंता और तनाव बढ़ता है। इससे नींद अच्छी नहीं आती और सुबह उठने पर भी थकान महसूस होती है।
इसके अलावा, यह आदत हमारे शरीर में तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) को बढ़ा देती है। इससे हम ज्यादा चिंतित और परेशान रहने लगते हैं। धीरे-धीरे इसका असर हमारी एकाग्रता और काम करने की क्षमता पर भी पड़ता है। इस आदत से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले, सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन का इस्तेमाल बंद कर दें। इस समय में आप किताब पढ़ सकते हैं, हल्का संगीत सुन सकते हैं या ध्यान कर सकते हैं। दूसरा, फोन को अपने बिस्तर से दूर रखें, ताकि बार-बार उसे उठाने का मन न करे। तीसरा, अगर फोन इस्तेमाल करना जरूरी हो, तो नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन करें। छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर हम डूम-स्क्रॉलिंग से बच सकते हैं और अपनी नींद व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।











