ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टिकरण का लंबा और सतत इतिहास है। ममता बनर्जी की असली राजनीतिक ताकत मुस्लिम वोट मतदाता वर्ग ही है। ममता बनर्जी अपने हर राजनीतिक और सरकारी निर्णयों में इस वर्ग का विशेष ख्याल रखती हैं। 2006 तक पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतदाता वर्ग पर वाम दलों का कब्ज़ा था। मगर 2009 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता पूर्णतः तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में लामबंद दिखे। 2021 में मुस्लिम बहुल जिलों में तृणमूल कांग्रेस ने एकतरफा जीत दर्ज़ की थी। मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस पार्टी और वाम दलों को छोड़कर एकतरफा ममता बनर्जी के लिए मतदान किया था। 2021 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी और वाम दलों का पश्चिम बंगाल में खाता भी नहीं खुल सका था।
2021 में मुस्लिम प्रभाव वाले जिलों में तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन

ममता बनर्जी पर हमेशा यह आरोप लगता रहा है कि वो हमेशा मुस्लिम समुदाय के पक्ष में खड़ी रहती हैं। ममता बनर्जी मुस्लिमों के तुष्टिकरण के लिए हमेशा बढ़-चढ़कर काम करती नज़र आती हैं। इनमें इमामों को भत्ता, अल्पसंख्यक समुदायों को विशेष योजनाओं का लाभ पहुँचाना ममता बनर्जी की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा हैं। ममता बनर्जी पर आरोप है कि वह मुसलमानों के वोट के लिए किसी अन्य समुदाय के भावनाओं का ख़याल नहीं करती हैं। मिसाल के तौर पर ममता बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए जनवरी 2024 में राम मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकरा दिया था।
सीएए का कर चुकी हैं विरोध
इसके अलावा ममता बनर्जी ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कहा था कि वो पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और नागरिक राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) की अनुमति नहीं देंगी। साल 2023 में हावड़ा में रामनवमी जुलूस पर मुस्लिम इलाके में हमला पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि अभी रमजान का महीना चल रहा है और इस महीने में मुसलमान कोई गलत काम नहीं करते हैं।
ममता सरकार ने बंगाल में कुल 179 जातियों को ओबीसी का दर्जा दिया, जिनमें से 118 जातियां मुस्लिम हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी को जय श्री राम के नारे से भी समस्या होती हैं और वो अक्सर इस नारे का विरोध करती हैं। ममता सरकार की पुलिस ने 2020 में कोलकाता में 44वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में हनुमान चालीसा बांटने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2017 में ममता बनर्जी ने कहा था कि हर रोहिंग्या मुस्लिम आतंकी नहीं है। इसलिए उन्हें वापस नहीं भेजना चाहिए। इसके अलावा 2017 में ममता सरकार ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी थी क्योंकि दुर्गा पूजा के अगले दिन मुहर्रम था।

















