भारतीय शतरंज में एक नया सितारा उभरा है। असम के गुवाहाटी के 17 वर्षीय मयंक चक्रवर्ती ने ग्रैंडमास्टर बनने का सपना सच किया। यह उनके करियर का तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म था। इस उपलब्धि के साथ मयंक भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बने और पूर्वोत्तर भारत से यह खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी भी बने।
मयंक ने ग्रैंडमास्टर बनने का सपना पूरा किया- मयंक ने 2024 में अंतर्राष्ट्रीय मास्टर बनने के बाद लगातार खेल में सुधार किया। उन्होंने ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ बाय फर्स्ट होटल्स चेस टैलेंट्स टूर्नामेंट’ में आठवें दौर में स्वीडिश इंटरनेशनल मास्टर फिलिप लिंडग्रेन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इस जीत के साथ ही उन्होंने आवश्यक 6.5 अंक पूरे कर लिए। अंतिम दौर में मयंक ने इंग्लिश इंटरनेशनल मास्टर जोना बी विलो के साथ ड्रॉ खेला। इस दौरान उन्होंने 2500 ईएलओ रेटिंग का महत्वपूर्ण आंकड़ा भी पार किया, जो ग्रैंडमास्टर बनने की शर्तों में से एक है। मयंक की रेटिंग अब इस सीमा से ऊपर है, जिससे उनका खिताब आधिकारिक रूप से पक्का हो गया।
मयंक: चेस का युवा स्टार- पूरे टूर्नामेंट में मयंक ने नौ में से सात अंक हासिल किए। उन्होंने आठ में से छह मैच जीते, दो ड्रॉ खेले और एक मैच हारा। इसके अलावा, उन्होंने टूर्नामेंट का खिताब भी अपने नाम किया। नॉर्वे के एक्सेल बू क्वालॉय के खिलाफ अंतिम दौर में वॉकओवर से उन्हें आधे अंक की बढ़त मिली। मयंक का शतरंज करियर बचपन से ही शानदार रहा है। अंडर-11 वर्ग में वह भारत और एशिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल थे। 2021 में यूरोप में कई टूर्नामेंट खेलकर उनकी ईएलओ रेटिंग 1800 से बढ़कर करीब 2200 हो गई। 2009 या उसके बाद जन्मे खिलाड़ियों में उनकी रैंकिंग दुनिया में छठवें नंबर पर रही। उन्होंने अंडर-9 में राष्ट्रीय रजत पदक, अंडर-11 में राष्ट्रीय स्वर्ण पदक और श्रीलंका में एशियाई युवा शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-10 वर्ग का रजत पदक भी जीता।

















