खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से भारत में तेल और एलपीजी की आपूर्ति की समस्या गहरा गई है। लेकिन इससे निपटने के लिए सरकार लगातार कोशिशें कर रही है। इसी क्रम में फारस की खाड़ी में तेल और गैस लदे 20 भारतीय टैंकर निकलने की तैयारी में हैं। ऐसे में इन तेल टैंकरों को सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने देने के लिए भारत सरकार ईरान से बातचीत कर रही है। इससे पहले भी ईरान ने दो भारतीय टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी थी।
क्या है पूरा मामला
पिछले महीने अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर हमलों के बाद हालात बिगड़ गए। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ऐलान किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा। ईरान अपने खाड़ी अरब पड़ोसियों पर हमले जारी रखेगा और इस रास्ते को बंद करके अमेरिका-इजरायल पर दबाव बनाएगा। नतीजा ये हुआ कि तेल, एलपीजी और एलएनजी से लदे कई टैंकर फंस गए। मार्च 2026 में ये स्थिति और गंभीर हो गई, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित हुई और भारत में भी चिंता बढ़ गई।
भारत के टैंकरों की स्थिति
सरकार के मुताबिक, फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले कुल 28 जहाज काम कर रहे हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में हैं, जहां 677 भारतीय नाविक सवार हैं। बाकी 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में हैं, जहां 101 भारतीय चालक दल के सदस्य हैं। इनमें से कुछ टैंकर तेल और गैस लेकर भारत आने वाले हैं, लेकिन रास्ता बंद होने से वे अटके हुए हैं।
ईरान के साथ बातचीत
भारत ने इस समस्या को सुलझाने के लिए ईरान से सीधी बात शुरू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की और क्षेत्र में स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा सामान के निर्बाध आने-जाने को प्राथमिकता बताई।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से हाल के दिनों में तीन बार बात की। ये बातचीत विदेश मंत्रालय स्तर पर चल रही है। मुख्य मकसद है कि 20 से ज्यादा टैंकरों को सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने दिया जाए।
कितने और किसके टैंकर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन 20 टैंकरों में से 10 टैंकर एलपीजी ले जा रहे हैं, जिन्हें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी भारतीय कंपनियों ने अनुबंधित किया है। 5 टैंकर कच्चा तेल लेकर जा रहे हैं। बाकी टैंकर अन्य रिफाइनरियों के लिए हैं। ये टैंकर खाड़ी में फंसे हैं और भारत इन्हें निकलवाने की कोशिश में जुटा है। बातचीत अभी जारी है और ईरान से पुख्ता आश्वासन का इंतजार है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों को गुजरने की इजाजत मिल सकती है, लेकिन ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई।

















