ईरान और इजराइल-संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल और गैस बाजार पर दिखाई देने लगा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। यदि इस रास्ते में किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए ऐसी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर यहां के एलपीजी बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है।
भारत में करोड़ों परिवार रोजाना खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। ऐसे में अगर गैस की आपूर्ति या कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है। हालांकि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की नियमित आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रही है और कुछ नियम भी लागू किए गए हैं, लेकिन इस समय गैस का समझदारी से उपयोग करना बेहद जरूरी हो गया है। थोड़ी सी सावधानी बरतकर घर में गैस की काफी बचत की जा सकती है।
गैस बचाने का सबसे आसान तरीका प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करना है। कई लोग दाल, चावल या सब्जियां खुले बर्तन में पकाते हैं, जिससे ज्यादा समय और ज्यादा गैस लगती है। लेकिन यही चीजें अगर प्रेशर कुकर में बनाई जाएं, तो खाना जल्दी पक जाता है और गैस की खपत कम होती है। माना जाता है कि कुकर के इस्तेमाल से लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक गैस की बचत की जा सकती है। एक आम गलती यह भी होती है कि लोग पहले गैस जला देते हैं और फिर सब्जियां काटने या मसाले ढूंढने लगते हैं। इस दौरान गैस बेकार में जलती रहती है। इसलिए बेहतर है कि चूल्हा जलाने से पहले सारी तैयारी कर ली जाए- सब्जियां काटकर रख लें और जरूरी सामान पास में रख लें।
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खाना बनाते समय बर्तन पर ढक्कन लगाकर पकाना भी गैस बचाने का अच्छा तरीका है। ढक्कन लगाने से भाप बाहर नहीं निकलती और खाना जल्दी पक जाता है, जिससे गैस की खपत कम हो जाती है। इसके अलावा गैस स्टोव और बर्नर को साफ रखना भी जरूरी है। यदि गैस की लौ नीली की बजाय पीली दिखाई दे, तो समझ लेना चाहिए कि बर्नर साफ करने की जरूरत है। साफ बर्नर गैस को सही तरीके से जलने में मदद करता है। अगर घर में इंडक्शन कुकटॉप या इलेक्ट्रिक केतली जैसे उपकरण उपलब्ध हों, तो उनका उपयोग भी किया जा सकता है। जैसे पानी उबालने या दूध गर्म करने के लिए इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल करने से गैस की बचत होती है। इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर हम एलपीजी की खपत कम कर सकते हैं और सिलेंडर को लंबे समय तक चला सकते हैं।











