दिल्ली के उत्तम नगर स्थित हस्तसाल इलाके में हुए ‘तरुण हत्याकांड’ ने पूरी राजधानी को दहला दिया है। एक मामूली विवाद से शुरू हुई यह घटना अब एक बड़े कानूनी और सांप्रदायिक मुद्दे का रूप ले चुकी है। 11 मार्च 2026 को इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाई भी हुई। इसकी जानकारी के साथ चलिए जानते हैं इस मामले में अब तक क्या हुआ है?
कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत 4 मार्च 2026 (होली की रात) को हुई। हस्तसाल के जेजे कॉलोनी में रहने वाले तरुण के परिवार की एक 11 साल की बच्ची ने छत से पानी का गुब्बारा फेंका, जो नीचे से गुजर रही एक महिला को लग गया। यह मामूली बात देखते ही देखते सांप्रदायिक रंग में रंग गई।
बताया जा रहा है कि महिला के पक्ष के करीब 50-60 लोगों ने तरुण के घर पर हमला कर दिया। इस दौरान 25 वर्षीय तरुण पर बल्लों, लाठियों और पत्थरों से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल तरुण ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
हत्या के बाद भड़की हिंसा
तरुण की मौत की खबर मिलते ही स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। उग्र भीड़ ने आरोपियों के घरों के बाहर खड़े वाहनों में आग लगा दी और पथराव किया। लोगों का आरोप था कि यह इलाका अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। स्थिति को बिगड़ते देख दिल्ली पुलिस ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और दंगाइयों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी उमरुद्दीन और उसके बेटों समेत अब तक 16 लोगों को हिरासत में लिया है।
बुलडोजर कार्रवाई
तरुण के परिवार और स्थानीय निवासियों ने मांग की कि आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाए, क्योंकि वे अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बने थे।
तरुण की हत्या के बाद गुस्से और तनाव के बीच एमसीडी ने 8 मार्च को आरोपियों के घर के अवैध हिस्सों पर बुलडोजर चला दिया। इसके बाद अन्य घरों पर भी कार्रवाई की तैयारी थी, लेकिन आरोपियों के परिजनों ने इस कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में प्रशासन की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट का तर्क था कि किसी भी निर्माण को गिराने से पहले कानूनी प्रक्रिया और उचित नोटिस की अवधि का पालन करना अनिवार्य है।
लेटेस्ट अपडेट
आज दिल्ली हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई पर रोक लगा दी। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित बंसल की बेंच ने साफ कहा कि किसी के घर को गिराने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। कोर्ट ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि ‘बुलडोजर न्याय’ कानून का विकल्प नहीं हो सकता।
इस बीच, तरुण के पिता मेमराज ने मामले की CBI जांच की मांग की है ताकि उनके बेटे को न्याय मिल सके। वह और परिवार के दूसरे सदस्य इस घटना से बहुत सदमे में हैं। घर में मातम का माहौल है।

















