भाग्यनगर (तेलंगाना) में 27 फरवरी से 1 मार्च तक भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आयोजित हुई। इसमें 37 प्रांतों के 512 पदाधिकारी शामिल हुए। सभा के दौरान पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा गया। कहीं भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। यहां तक कि कार्यक्रम स्थल की साज-सज्जा में फूल-पत्तों का प्रयोग किया गया।
भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री श्री मोहिनी मोहन मिश्र ने बताया कि गो-आधारित जैविक कृषि और गो-कृषि वाणिज्यम् को बढ़ावा देने तथा देशी नस्ल के गोवंश विकास के लिए प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें गोवंश के लिंग नियंत्रण पद्धति को रोकने तथा देशी नस्ल के गोवंश के विकास की बात कही गई है।
श्री मिश्र ने बताया कि भारतीय गोवंश जलवायु अनुकूलता, सर्वाधिक दूध पौष्टिकता, रोग प्रतिरोधकता क्षमता, गोबर व गो-मूत्र में मौजूद लाभदायक जीवाणुओं की दृष्टि से भू सुपोषण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए किसान संघ की मांग है कि देश भर में गोवंश संपदा को लुप्त करने वाली सैक्स सार्टेड सीमेन तकनीकी (लिंगानुसार वगीकृत वीर्य तकनीक) का उपयोग बंद किया जाए। निराश्रित बछड़ों की समस्या का समाधान प्रबंधन से संभव है न कि गोवंश को लुप्त करके।
कदापि देशी गोवंश नस्ल के लुप्त होने पर गोवंश विविधता को पुनः वापस लाना संभव नहीं होगा। श्री मिश्र ने बताया कि गो कृषि वाणिज्यम् को केंद्र में रख कर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में कार्यक्रम की रचना तैयार की गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री रामलाल, प्रांत प्रचारक श्री श्रीधर, भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह सहित अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि हमारा विचार देश और दुनिया की समस्याओं का समाधान देने वाला है। गो कृषि वाणिज्यम् हमारी कृषि अर्थव्यवस्था का आधार है। इसके लिए सफल मॉडल हमें समाज के सामने रखने की जरूरत है। श्री कुलकर्णी ने कहा कि ग्राम समिति के कार्यकर्ता ही हमारे संगठन का आधार हैं, कार्यक्रम की नहीं कार्यकर्ता की चिंता करें।
भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री के.साई. रेड्डी ने संगठनात्मक, आंदोलनात्मक और रचनात्मक आयामों के कार्यों में वृद्धि पर जोर देते हुए कहा कि आगामी स्वर्ण जयंती वर्ष को लेकर संगठन का एक लाख गांवों तक विस्तार किया जाएगा। इसके लिए सतत् प्रवास, वार्षिक कार्ययोजना, आर्थिक स्वावलंबन, प्रशिक्षण वर्ग, सदस्यता अभियान के लक्ष्य निर्धारित किए गए।

















