ईरान ने युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में अचानक से उछाल आ गया है। भारत जैसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ऐसे में अब अमेरिका ने एक बार फिर से भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे दी है।
हालांकि, अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए ये छूट अस्थायी तौर पर दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कई तेल टैंकर फंस गए हैं। अहम बात ये है कि ये छूट फिलहाल 30 दिनों के लिए ही है।
क्या है मामला?
दरअसल, ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे विवाद की वजह से हॉर्मुज स्ट्रेट में तेल के जहाज रुक गए हैं। यह जगह दुनिया के करीब 20% तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार के लिए बहुत अहम है। अगर यहां रुकावट बनी रही तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत अपनी 88% कच्चे तेल और लगभग 50% प्राकृतिक गैस की जरूरत आयात से पूरी करता है, और ज्यादातर यह सामान इसी हॉर्मुज रास्ते से आता है। ऐसे में तेल की कमी या महंगाई भारत के लिए बड़ी समस्या बन सकती है।
अमेरिका ने इसी वजह से भारत के रिफाइनर्स को एक छोटी-सी राहत दी है। गुरुवार को दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि भारत को 30 दिनों की अस्थायी छूट मिली है। यह छूट सिर्फ उन रूसी तेल के जहाजों पर लागू है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए हैं और भारत की तरफ जा रहे हैं। मतलब, नए सौदे या नई खरीद पर यह छूट नहीं है, सिर्फ पहले से चल रहे कार्गो को अनलॉक करने के लिए।
अमेरिकी अधिकारी स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा, “ग्लोबल मार्केट में तेल का बहाव बनाए रखने के लिए हम भारतीय रिफाइनर्स को रूसी तेल खरीदने की 30 दिनों की छूट दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म कदम है और इससे रूसी सरकार को कोई खास आर्थिक फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह पुराने, फंसे हुए लेन-देन पर ही लागू है।
अमेरिका का रुख और सहयोग
अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने भी कहा कि वो भारत के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि भारत की अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत वैकल्पिक स्रोतों पर विचार कर रहा होगा, लेकिन साथ ही बोला, “मुझे अमेरिका से बेहतर कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं दिखता। हम भारत के साथ सहयोग करना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट अब आखिरी चरण में है।















