नेपाल में Zen-Z प्रदर्शनों के बाद आज (5 मार्च 2026) एक बार फिर से देश में आम चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है, देशभर के करीब 1.89 करोड़ वोटर नए प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों के भाग्य का फैसला करेंगे। ये चुनाव पिछले साल सितंबर में युवाओं, खासकर जेन जेड की बड़ी उथल-पुथल के बाद हो रहे हैं, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी।
नेपाल में सरकारी स्तर पर अस्थिरता लंबे वक्त से रही है। वहां पिछले 20 सालों में 15 सरकारें बनीं-गिरीं, लेकिन इस बार मामला अलग है क्योंकि ये बदलाव सड़क पर उतरे युवाओं की वजह से आया है।
सितंबर 2025 का Zen-Z आंदोलन
सितंबर 2025 में नेपाल में युवाओं ने ओली के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार के खिलाफ आंदोलन शुर किया। Zen-Z बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरा। दरअसल, देश में युवाओं की बेरोजगारी दर 20.6% तक पहुंच गई थी। करीब 30 लाख नेपाली गल्फ देशों में काम करते हैं, रेमिटेंस से अर्थव्यवस्था चलती है। सोशल मीडिया पर नेताओं के बच्चे थाईलैंड, स्विट्जरलैंड की छुट्टियां, महंगे गिफ्ट्स और शादियां दिखाते थे, जिससे आम लोगों को बहुत बुरा लगता था।
25 साल के लैब टेक्निशियन सतीश कुमार यादव ने कहा था, “बड़े नेताओं के बच्चे थाईलैंड-स्विट्जरलैंड में मौज करते हैं, लेकिन आम आदमी के बच्चे गल्फ में मजदूरी करने जाते हैं।” सोशल मीडिया पर बैन की खबर ने आग में घी डाल दिया। 8 सितंबर को हजारों सड़कों पर उतरे, दो दिन में पुलिस फायरिंग से 77 लोग मारे गए। ओली को परिवार के साथ काठमांडू छोड़कर भागना पड़ा।
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सुशीला कार्की बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री
ओली के जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया। वो नेपाल की पहली महिला पीएम बनीं। उनका काम था देश को स्थिर करना और चुनाव करवाना। जेन जेड एक्टिविस्ट्स अभी भी सतर्क थे। चुनाव आचार संहिता के तहत अब प्रचार बंद है, पोलिंग स्टेशन के 300 मीटर में कोई सामग्री नहीं।
लोग गांव जा रहे वोट डालने
काठमांडू के कोटेश्वर बस पार्क में हजारों लोग अपने दूर-दराज के जिलों के लिए निकल रहे हैं, जैसे कोई त्योहार हो। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक 3 लाख से ज्यादा लोग रोड से गए, और संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है। एक वोटर बिदुर नेपाली ने कहा, “मेरा यहां बिजनेस है, लेकिन वोट देने अपने क्षेत्र जा रहा हूं। सितंबर की घटना देखकर अब वो पार्टी को वोट दूंगा जो देश के लिए सच में काम करे।” राजू चौलागाईं बोले, “ऐसा कैंडिडेट चाहिए जो देश में ही नौकरियां लाए, लोगों को बाहर न जाना पड़े।”
आंकड़ों की बात करें तो देश में 18.9 मिलियन वोटर (9.66 लाख पुरुष, 9.24 लाख महिला, 200 अन्य जिसमें नॉन-बाइनरी और LGBTQ+ शामिल) हैं। 2022 के बाद से वोटर लिस्ट में करीब 10 लाख बढ़ोतरी हुई, ज्यादातर युवा प्रदर्शनों के बाद पंजीकृत हुए। नेपाल में वोटिंग उम्र 18 साल है।

















