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होम बिजनेस

कहां ले जाएगी कर्ज की होड़!

एआई की होड़ में कोई भी पिछड़ना नहीं चाहता। इसलिए बड़ी टेक कंपनियां एआई डेटा सेंटर, चिप्स और क्लाउड अवसंरचना विकास के लिए ताबड़तोड़ कर्ज ले रही हैं। कर्ज की राशि कई छोटे देशों की जीडीपी से भी अधिक है। जहां छोटे देशों को बॉण्ड के जरिए कर्ज जुटाने में महीनों लग जाते हैं, वहीं माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां चुटकी बजाते कर्ज जुटा ले रही हैं

Written byनागार्जुननागार्जुन
Mar 2, 2026, 08:06 am IST
in बिजनेस

इस समय प्रौद्योगिकी क्षेत्र ऐसे संरचनात्मक बदलाव से गुजर रहा है, जो चुपचाप कॉरपोरेट फाइनेंस की परिभाषा बदल रहा है। एक समय था, जब बड़ी टेक कंपनियां विशाल नकद भंडारों से अपने एआई सपनों को आगे बढ़ाती थीं। इनके वित्तीय भंडार कई छोटे देशों की पूरी अर्थव्यवस्था से भी बड़े होते थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। नकद की बजाय, ये कंपनियां अब तक के सबसे बड़े पूंजीगत विस्तार को कर्ज के जरिये वित्तपोषित कर रही हैं। मेटा, एप्पल, अमेजन, ओरेकल, अल्फाबेट जैसी टेक कंपनियों में आया कर्ज उछाल निवेशकों के जोखिम और बाजार की गतिशीलता को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। ये कंपनियां क्लाउड कंप्यूटिंग देती हैं तथा एआई को सीधे लोगों व कंपनियों तक पहुंचाती हैं।

छोटे देशों की जीडीपी से अधिक कर्ज

ओरेकल, एप्पल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा ने इतना भारी-भरकम कर्ज जुटा लिया है, जो कई छोटे देशों के राष्ट्रीय कर्ज या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक है। उदाहरण के लिए, ओरेकल का दीर्घकालिक ऋण 100 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है, जो किरिबाती के 0.3 अरब डॉलर की जीडीपी से 333 गुना अधिक, टोंगा के 0.6 अरब डॉलर से 166 गुना अधिक, सिएरा लियोन की 3.8 अरब डॉलर से 26 गुना अधिक और किर्गिस्तान की 13 अरब डॉलर जीडीपी से 7.7 गुना अधिक है। अमेजन का 94.2 अरब डॉलर कर्ज मॉरीशस की 14 अरब डॉलर जीडीपी से 6.7 गुना बड़ा है। इसी तरह, एप्पल का कुल कर्ज 54.7 अरब डॉलर है, जो गिनी-बिसाऊ जैसे 1.7 अरब डॉलर की जीडीपी वाले देश से अधिक है। इन कंपनियों द्वारा लिया जा रहा कर्ज मुख्य रूप से एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग अवसंरचना और डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

2026 के प्रारंभ तक बिग टेक कंपनियों का कुल कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो लगातार बढ़ रहा है। इस सूची में ओरेकल शीर्ष पर है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कंपनियां किसी भी देश की तुलना में बहुत कम समय में कर्ज जुटा ले रही हैं। जैसे-गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने मात्र 24 घंटे में 32अरब डॉलर का कर्ज जुटा लिया, जो एक दिन में किसी कंपनी द्वारा जुटाए गए कर्ज का विश्व रिकॉर्ड है। इसी तरह, एप्पल का कुल कर्ज 54.7 अरब डॉलर, अमेजन का 94.2 अरब डॉलर, मेटा का 81.6 अरब डॉलर और माइक्रोसॉफ्ट का कर्ज भी इसी स्तर का है। 2025 में ओरेकल ने कुल 56 अरब डॉलर का नया कर्ज जुटाया, जिसमें 18 अरब डॉलर बॉण्ड और 38 अरब डॉलर कर्ज के रूप में शामिल हैैं। अमेरिका की पांच प्रमुख दिग्गज टेक कंपनियों (अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, एप्पल और अल्फाबेट) का संयुक्त कर्ज ही 457 अरब डॉलर हो चुका है। यह स्पेन की 1.6 खरब डॉलर की जीडीपी से भले ही कम है, पर दुनिया के 100 छोटे देशों के संयुक्त उत्पादन से अधिक है। 2025 की चौथी तिमाही में इन कंपनियों ने बॉण्ड मार्केट से 108.7 अरब डॉलर का कर्ज जारी किया, जो सस्ते ब्याज दरों के कारण संभव हुआ।

जोहो कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेंबू ने हाल ही में इन टेक कंपनियों की तुलना ‘ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी’ से की है, क्योंकि इनकी आर्थिक और तकनीकी ताकत अब कई संप्रभु राष्ट्रों से भी बड़ी हो चुकी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘इसे ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह सोचने का तरीका अपनाएं।’ उनकी यह प्रतिक्रिया अल्फाबेट के 24 घंटे में कर्ज की बड़ी राशि जुटाने पर थी। इससे पहले जनवरी 2026 में उन्होंने चेतावनी दी थी कि भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी फिर से लौट आई है। बता दें कि जोहो कर्ज मुक्त है और इसका वार्षिक राजस्व 1 अरब डॉलर से अधिक है।

बदलता जोखिम प्रोफाइल

एआई ढांचे पर हो रहा खर्च बिग टेक कंपनियों की बैलेंस शीट और उनके जोखिम प्रोफाइल को बदल रहा है। ओरेकल और एप्पल के पास जितना नकद है, उससे कहीं अधिक उन पर कर्ज है। ऐसा नहीं है कि अमेजन सहित अन्य बड़ी टेक कंपनियों द्वारा लिया जा रहा भारी-भरकम कर्ज किसी तात्कालिक वित्तीय संकट का संकेत है। दरअसल, यह एआई की दौड़ में कहीं पिछड़ न जाने की मजबूरी को दर्शाता है। इन कंपनियों का बॉण्ड बाजारों से अरबों डॉलर का उधार जुटाना दर्शाता है कि प्रतिस्पर्धा की रफ्तार इतनी तेज हो चुकी है कि कंपनियां भविष्य की बढ़त सुनिश्चित करने के लिए अपने जोखिम प्रोफाइल को नए सिरे से गढ़ने को तैयार हैं।

मेटा इस संरचनात्मक बदलाव की अगुआई कर रही है। मेटा ने लुइसियाना स्थित हाइपरियन डेटा सेंटर के लिए ब्लू आउल कैपिटल के साथ 27 अरब डॉलर का करार किया है। यह मेटा का अब तक का सबसे बड़ा निजी आर्थिक लेन-देन है। यह सौदा सिंथेटिक लीज और ऑफ-शीट-बैलेंस संयुक्त उपक्रम के जरिये किया गया है। इसमें ब्लू आउल कैपिटल की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत और मेटा की 20 प्रतिशत है। मेटा इस डेटा सेंटर की पूरी क्षमता को लीज पर वापस ले लेती है, लेकिन कर्ज संयुक्त उपक्रम की बैलेंस शीट पर ही दिखता है, मेटा की बैलेंस शीट पर नहीं। इससे मेटा को बिना कर्ज का बोझ बढ़ाए बड़ा निवेश मिलता है। यह संकेत है कि एआई युग के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को वित्तपोषण करने के तरीके में बिग टेक ने जानबूझकर दिशा बदल ली है। यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पूरे सेक्टर का जोखिम प्रोफाइल बदलता है। इसमें कॉरपोरेट बैलेंस शीट्स की संरचना नए सिरे से बनती है और संस्थागत निवेशकों को मूल्यांकन, क्रेडिट गुणवत्ता तथा सिस्टम-स्तरीय जोखिम को देखने का नजरिया भी बदलना पड़ता है।

जिन बिग टेक कंपनियों पर सबसे अधिक कर्ज है, उनमें ओरेकल और एप्पल प्रमुख हैं। भले ही इसके कारण अलग-अलग हैं, लेकिन हाइपरस्केलर की दौड़ में दोनों ही सबसे अधिक फायदा उठा रही हैं। ओरेकल ने कर्ज का बड़ा हिस्सा अपने विशाल क्लाउड ढांचे के विस्तार के लिए लिया है। वहीं, एप्पल की स्थिति भले ही अत्यंत लाभकारी बनी हुई हो, लेकिन उस पर कर्ज बैलेंस शीट पर मौजूद नकद से अधिक है। मेटा से इतर ओरेकल ने अलग रास्ता अपनाया है। इसने अगले चार वर्ष तक हर साल 25 अरब डॉलर उधार लेने की योजना बनाई है। इससे उसका कुल समायोजित कर्ज 2028 तक 100 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 290 अरब डॉलर हो जाएगा। प्रति डॉलर इक्विटी पर 4.50 डॉलर के कर्ज के साथ ओरेकल की पूंजी संरचना पूरे सेक्टर में सबसे आक्रामक मानी जा रही है। उसके कर्ज पर क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप्स अक्तूबर 2023 के बाद से लगभग उच्चतम स्तरों के पास बने हुए हैं। क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप्स एक वित्तीय डेरिवेटिव अनुबंध है, जो ऋ ण डिफॉल्ट (उधारकर्ता द्वारा भुगतान न करने पर) के जोखिम से बचाव करता है। बैंक या निवेशक इसे क्रेडिट जोखिम हस्तांतरित करने के लिए खरीदते हैं।

हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट का तरीका अपेक्षाकृत संयमित है। वह नकदी प्रवाह को पूरा करने के लिए कर्ज जारी करती है। सीमित लीवरेज बनाए रखते हुए 2027 तक डेटा सेंटर क्षमता को दोगुना करने की योजना पर काम कर रही है। अमेजन अब भी अपने मजबूत 121.1 अरब डॉलर के कैश फ्लो पर निर्भर है, लेकिन 30 अरब डॉलर से अधिक के तिमाही पूंजीगत व्यय को बनाए रखने के लिए वह चुपचाप क्रेडिट बाजारों का रुख भी कर रही है। अल्फाबेट ने 2025 के लिए 85 अरब डॉलर के भारी निवेश (कैपेक्स) का लक्ष्य रखा था। एआई की मांग तेजी से बढ़ने से यह दबाव में है, खासकर तब जब एंथ्रॉपिक ने अरबों डॉलर के 10 लाख गूगल टीपीयू चिप्स बुक कर लिए हैं। टीपीयू का मतलब होता है टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट। यह गूगल द्वारा निर्मित एक विशेष चिप है, जिसे एआई और मशीन लर्निंग के कार्यों को तेज करने के लिए तैयार किया गया है, खासकर न्यूरल नेटवर्क के ट्रेनिंग और प्रेडिक्शन के लिए। टीपीयू सामान्य सीपीयू या जीपीयू अलग होता है, जो मैट्रिक्स गणना में बहुत तेज है और गूगल के टेंसरफ्लो सॉफ्टवेयर के साथ काम करती है।

कर्ज में उछाल का पैमाना

गोल्डमैन सैक्स की एआई इक्विटी बास्केट में शामिल कंपनियों ने 2025 में 141 अरब डॉलर का कॉरपोरेट कर्ज जारी किया, जो 2024 के 127 अरब डॉलर के आंकड़े को पहले ही पार कर चुका है। 1,300 बड़ी टेक कंपनियों में कुल ब्याज युक्त कर्ज अब 1.35 खरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो एक दशक पहले की तुलना में चार गुना है। ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यही नहीं, व्यक्तिगत लेन-देन का आकार भी तेजी से बढ़ा है। सितंबर 2025 में ओरेकल द्वारा की गई 18 अरब डॉलर की बॉण्ड बिक्री लगभग पांच गुना अधिक सब्सक्राइब हुई। अब कंपनी टेक्सास और विस्कॉन्सिन में नए डेटा सेंटरों के लिए 38 अरब डॉलर के कर्ज पैकेज की तैयारी कर रही है। मेटा का 27 अरब डॉलर का ब्लू आउल कैपिटल सौदा 26 अरब डॉलर के कर्ज और 2.5 अरब डॉलर की इक्विटी से बना है, जिसमें बॉण्ड हिस्से का नेतृत्व PIMCO कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट का तिमाही पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में बढ़कर 34.9 अरब डॉलर हो गया, जो पिछली तिमाही में 24.2 अरब डॉलर था, जबकि मेटा ने अपने वार्षिक मार्गदर्शन को बढ़ाकर 70-72 अरब डॉलर कर दिया, जो 2024 के 37.3 अरब डॉलर से लगभग दोगुना है।यानी टेक कंपनियां यह सब रणनीति के तहत यह कदम उठा रही हैं। निवेशक इनका आकलन Debt-to-Equity और Debt-to-Capital जैसे अनुपातों से करते हैं। Debt-to-Equity बताता है कि शेयरधारकों के पैसे (इक्विटी) की तुलना में कितना ऋ ण है, जबकि Debt-to-Capital कुल पूंजी (ऋ ण+इक्विटी) में ऋ ण की हिस्सेदारी दर्शाता है। ये अनुपात बताते हैं कि किसी कंपनी की वृद्धि के लिए उधार पर निर्भरता उसके अपने वित्त की तुलना में कितनी है। इस मामले में ओरेकल का अनुपात 500 प्रतिशत से भी अधिक है, जो दर्शाता है कि कंपनी अपने संचालन के लिए कर्जदाताओं पर अत्यधिक निर्भर है। यदि उसकी एआई निवेश योजनाएं तत्काल अपेक्षित रिटर्न नहीं देतीं, तो यही निर्भरता एक बड़ा वित्तीय जोखिम बन सकती है। Debt-to-Capital काउच्च अनुपात दर्शाता है कि कंपनी कर्ज पर ज्यादा निर्भर है, जो जोखिम बढ़ा सकता है, जबकि कम अनुपात वित्तीय स्थिरता का संकेत देता है।

मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी कहते हैं, “यह बहुत सारा कर्ज है और वह भी अचानक। जब कंपनियां जोखिम भरी परियोजनाओं के लिए कर्ज लेती हैं, तो यह व्यापक वित्तीय प्रणाली के लिए खतरा पैदा कर सकता है। अगर वित्तीय प्रणाली खतरे में है, तो फिर पूरी अर्थव्यवस्था खतरे में है।” विश्लेषक बताते हैं कि पिछले तकनीकी विकास के दौर में, जैसे 1990 के दशक में इंटरनेट-आधारित कंपनियों के तेजी से उभरने और निवेश करने के समय, कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर पर इतना खर्च नहीं करना पड़ता था। अधिकांश कंपनियों के लिए यह कर्ज रणनीतिक है। माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अल्फाबेट अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति बनाए हुए हैं, क्योंकि इनके पास मौजूद नकद भंडार उनकी कुल कर्ज देनदारियों से अधिक है। ये कंपनियां विज्ञापन, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और अन्य विविध राजस्व स्रोतों का उपयोग एक तरह के वित्तीय सुरक्षा कवच के रूप में करती हैं। लेकिन ओरेकल के साथ ऐसा नहीं है। ओरेकल डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं के लिए बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

हाल ही में Financial Times में एक लेख आया, जिसमें सवाल उठाया गया कि क्या बड़ी तकनीकी कंपनियों का कर्ज बढ़ाना अमेरिकी कॉर्पोरेट बॉण्ड में एआई से जुड़े जोखिम पैदा कर सकता है? मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि हाइपरस्केलर कंपनियां 2026 में एआई के विकास के लिए लगभग 400 अरब डॉलर का कर्ज उठाएंगी। वहीं, जेपीमॉर्गन के अनुसार, एआई औरडेटा सेंटर कंपनियों के कर्ज का हिस्सा उसके 10 खरब डॉलर के निवेश ग्रेड बॉण्डा इंडेक्स का 14.5 प्रतिशत, यानी लगभग 1.5 खरब डॉलर है। इतना बड़ा खर्च है! और अगर इन निवेशों से उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं मिला, तो यह न सिर्फ इन कंपनियों के लिए, बल्कि उनके शेयर खरीदने वाले निवेशकों के लिए भी बड़ा झटका हो सकता है।

कर्ज की प्रवृत्ति पर चेतावनी

टेक कंपनियां भारी-भरकम कर्ज इसलिए ले रही हैं, क्योंकि वे कृत्रिम बुद्धिमता की होड़ में पिछड़ना नहीं चाहतीं। ओरेकल ने एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 82 अरब डॉलर का दीर्घकालिक कर्ज लिया, जबकि अमेजन ने अपनी एडब्ल्यूएस (सेवा विस्तार के लिए), माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर क्लाउड के लिए और गूगल क्लाउड के लिए प्रतिवर्ष 100 अरब डॉलर से अधिक का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) कर रही है। एप्पल जैसी कंपनियां शेयर बायबैक, डिविडेंड और नकद प्रबंधन के लिए बॉण्ड जारी कर रही हैं। 2025 में एआई से जुड़े डेटा सेंटर्स और जीपीयू चिप्स के लिए कुल 141 अरब डॉलर का कर्ज जुटाया गया। वर्तमान में ब्याज दरें कम होने से यह कर्ज सस्ता पड़ रहा है, लेकिन कंपनियां जानती हैं कि एआई की होड़ में जीतने के लिए अभी निवेश जरूरी है। ओरेकल के 18 अरब डॉलर के बॉण्ड इश्यू के लिए 90 अरब डॉलर की बोलियां आईं, जो निवेशकों के असाधारण भरोसे का संकेत है। गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है, ‘सीमांत रूप से क्रेडिट बाजारों के लिए इसके निहितार्थ नकारात्मक हैं।’

वैसे, टेक कंपनियों के विशाल कर्ज से किसी देश को सीधा खतरा नहीं है, क्योंकि इनकी वार्षिक आय खरबों में है और डिफॉल्ट का जोखिम कम है। हालांकि, कई अप्रत्यक्ष खतरे हैं। इनमें सबसे बड़ा है बॉण्ड मार्केट पर दबाव, क्योंकि 2026 में ये कंपनियां 400 अरब डॉलर से अधिक बॉण्ड जारी करेंगी, जिससे वैश्विक ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और विकासशील देशों को महंगा कर्ज मिलना मुश्किल हो सकता है। यदि ओरेकल का नकारात्मक कैश फ्लो लंबे समय तक चलता रहा, तो डेब्ट-टू-ईबीआईटीडीए अनुपात 4 गुना से ऊपर चला जाएगा, जो क्रेडिट रेटिंग पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। छोटे देशों को बॉण्ड बिक्री में मुश्किल हो रही है, जबकि टेक कंपनियां आसानी से धन जुटा रही हैं, जो वैश्विक असंतुलन को बढ़ावा दे रहा है।

श्रीधर वेंबू ने बिग टेक की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से इसलिए की, क्योंकि 17वीं सदी में ईस्ट इंडिया कंपनी ने व्यापार से शुरू करके राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण हासिल कर लिया था, ठीक वैसे ही आज बिग टेक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (क्लाउड, एप्स, डेटा सेंटर्स) पर कब्जा कर रही हैं। इन कंपनियों की वित्तीय क्षमता राष्ट्रों जैसी हो गई है। अल्फाबेट एक दिन में 32 अरब डॉलर जुटा लेती है, जो कई देश कई महीनों में भी नहीं जुटा पाते। इनका डेटा और संचार पर नियंत्रण फ्रांस जैसे देशों को अमेरिकी टूल्स छोड़ने पर मजबूर कर रहा है। वेंबू का कहना है कि ईस्ट इंडिया ने भारत को लूटा, उसी तरह बिग टेक डेटा व अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करके ‘डिजिटल उपनिवेशवाद’ फैला सकती हैं। वे तकनीकी संप्रभुता पर जोर देते हैं और कहते हैं कि भारत को स्वदेशी प्रौद्योगिक विकसित करना चाहिए। ईस्ट इंडिया का कर्ज कभी उसके जीडीपी का 10 गुना था, जबकि टेक का कर्ज अनुपात ऊंचा है, लेकिन आय से कवर हो रहा है। फिर भी, एप्पल का 3 खरब डॉलर मार्केट कैप चार देशों से अधिक है।

खतरा प्रत्यक्ष आर्थिक नहीं, बल्कि डिजिटल निर्भरता और भू-राजनीतिक है। भारत जैसे देशों को सतर्क रहना चाहिए और नीतियां बनानी चाहिए। 2026-27 में टेक कैपेक्स 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे कर्ज और बढ़ेगा। इसे देखते हुए देशों को डिजिटल संप्रभुता के लिए नीतियां बनानी होंगी, जैसे डेटा लोकलाइजेशन और स्वदेशी क्लाउड। वेंबू की चेतावनी इतिहास से सीख लेने की है ताकि ईस्ट इंडिया कंपनी की पुनरावृत्ति न हो। इसलिए वे ‘टेक संप्रभुता’ की वकालत कर रहे हैं। भारत को सतर्क रहकर स्वदेशी तकनीक विकसित करनी चाहिए।

Topics: हाइपरस्केलरसिंथेटिक लीजटेंसर प्रोसेसिंग यूनिटक्रेडिट डिफॉल्ट स्वैपऋण-जीडीपीतकनीकी संप्रभुतातकनीक और डेटाराष्ट्र की संप्रभुताबॉण्ड मार्केटकर्ज की होड़पाञ्चजन्य  विशेषएआई इंफ्रास्ट्रक्चरपूंजीगत व्यय
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राहुल गांधी

विशेष रिपोर्ट : बोलने से पहले इतिहास पढ़ें ‘राहुल’

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Dehradun police Encounter

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Love Jihad Islamic conversion Bhopal

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केरलम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही, मरीज के सर्जिकल घाव में रेंगते मिले कीड़े

मोदी सरकार में पूर्वोत्तर बना भारत का विकास इंजन

देहरादून FRI रेंजर्स कॉलोनी की भूमि बना दी मजार, वक्फ में भी दर्ज किया पर दस्तावेज नहीं दिखा सके

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Anthropic ने चुनिंदा भारतीय कंपनियों को Claude Mythos AI मॉडल का एक्सेस दिया, क्या होंगे फायदे?

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