गत 22 फरवरी को अयोध्या में ‘श्रीरामार्चनम्’ नाम से एक विशेष कार्यक्रम हुआ। इसमें गणवेश में घोष की धुनों पर एक साथ तालमेल से उठते कदम, साथ में भारतीय रागों पर आधारित स्वरलहरी ने संपूर्ण वातावरण को अलौकिक बनाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत के घोष दल के स्वयंसेवक सरयू तट से पथ संचलन करते हुए प्रभु श्रीराम के मंदिर तक पहुंचे। मार्ग में वीणा चौक पर बलिदानी कारसेवकों और स्वर साम्राज्ञी लता जी को स्वराञ्जलि समर्पित की।
यहां से संचलन करते हनुमानगढ़ी पहुंचे घोष दल ने पवन पुत्र का अभिनंदन किया। इससे आगे रामपथ पर लगभग 10 मिनट रुक कर स्थिरवादन किया। घोष वादकों ने भारतीय सांगीतिक परंपरा की गरिमा को सजीव किया। वाद्यों में शंख (बिगुल), शृंग (तूर्य) एवं वेणु (बांसुरी) की मनोहारी रचनाएं तथा आनक (छोटा ड्रम) की उत्साहवर्धक प्रस्तुति रही।
समस्त घोष रचनाएं विभिन्न भारतीय शास्त्रीय रागों एवं निर्धारित तालों पर आधारित रहीं। प्रस्तुति में शास्त्रीयता एवं अनुशासन का समन्वय दिखा। रागों की मधुरता और ताल की संतुलित गति से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत होता रहा। कार्यक्रम में चार प्रमुख गीतों की घोष रचनाओं वीर सावरकर रचित ‘जयोस्तुत’, ‘राम स्तुति’, ‘राम भक्त ले चला रे राम की निशानी’ और ‘श्रीराम चंद्रकृपालु भजमन्’ ने वातावरण को प्रेरणादायी व भक्तिमय बना दिया।
सबसे अंत में घोष दल ने राम मंदिर परिसर में ग्रीन हाउस मैदान के सामने रामलला को ‘श्रीरामार्चनम्’ की प्रस्तुति दी। इसके बाद परकोटे के सिंह द्वार पर घोष शाखा लगाई। लगभग 45 मिनट की शाखा में विभिन्न रचनाओं के वादन के बाद शाखा विकिर हुई और वादक दल ने प्रभु श्री रामलला के दर्शन किए।

















