जैसे झारखंड का जामताड़ा साइबर फ्रॉड के लिए बदनाम हो गया है, वैसे ही उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का एक इलाका “मिनी जामताड़ा” के नाम जाना जाने लगा है। रविवार सुबह 240 से ज़्यादा पुलिस अधिकारियों ने इस इलाके में रेड मारी। डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने 20 से अधिक गाड़ियों में अधिकारियों के साथ दो गाँवों विशंभरा और झंझावली में दबिश दी।
सुबह-सुबह छापा, खेतों से पकड़े गए साइबर ठग
खेतों में छिपे साइबर अपराधियों को पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ा। कई घरों की तलाशी ली गई। पुलिस ने 34 लोगों को हिरासत में लिया है। 45 लोग फरार होने में सफल गए। मौके से पुलिस ने 5 गाड़ियां जब्त की गई हैं। पुलिस ने रविवार की भोर में ऐसे समय दबिश दी जब गांव वाले सो रहे थे। भारी पुलिस बल के साथ पूरे गांव को घेर लिया गया। पुलिस का कहना है कि इन गांवों से ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर ठगी, हैकिंग, फिशिंग, स्पैम कॉल-ईमेल, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और सेक्सटॉर्शन का नेटवर्क चलाया जा रहा है। दिलचस्प बात है कि इस प्रकार का साइबर फ्राड करने वाले ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं। मुश्किल से हाईस्कूल पास युवक साइबर फ्राड कर रहे हैं।
दरअसल, भौगोलिक परस्थितियों ने इस इलाके को यूपी का मिनी जामताड़ा बनाया है। मथुरा के गोवर्धन में 20 किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाले गांव दो राज्यों की सीमा से सटे हुए हैं। एक तरफ राजस्थान और दूसरी तरफ हरियाणा की सीमा सटी हुई है। यहां के गांवों के युवक सामूहिक स्तर पर साइबर फ्राड में लगे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि मथुरा के सीमा क्षेत्र पर स्थित करीब एक दर्जन गांव ऐसे हैं जहां पर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी का धंधा किया जा रहा है। यहां के साइबर ठग देश-विदेशों में ठगी कर रहे हैं। गत 11 दिसंबर 2025 को इसी क्षेत्र के कई गांवों में 12 घंटे तक 400 पुलिसवालों ने दबिश दी थी। इस कार्रवाई में 42 जालसाजों की पहचान की गई थी। पुलिस ने 37 को गिरफ्तार भी किया।
















