गीतकार और स्क्रीनराइटर ने जावेद अख्तर ने अफगानिस्तान तालिबान के नए कानून जिसके तहत महिलाओं को हड्डियां तोड़े बिना पीटने की इजाजत है, पर गुस्सा जताया है। इस कानून में यह भी कहा गया है कि अगर बीवी अपने शौहर की इजाजत के बिना अपने माता-पिता के घर जाएगी तो उसे जेल हो सकती है। अख्तर ने देश के धार्मिक नेताओं से इस कानून की बुराई करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि तालिबानों ने पत्नी को पीटे जाने को कानूनी कर दिया है, लेकिन हड्डियों को तोड़े बिना। वहीं पति की इजाजत के बिना अपने ही माता-पिता के घर जाने पर तीन महीने जेल की सजा। उन्होंने कहा कि ये सब धर्म के नाम पर किया जा रहा है। उन्होंने तालिबान को ‘दुनिया की गंदगी’ करार दिया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, तालिबान के द्वारा लाए गए नए कोड में धार्मिक जानकार कोई अपराध करता है कि उसे अधिक से अधिक किसी प्रकार की चेतावनी या सलाह ही दे सकता है। इसके अलावा समाज के अमीर लोगों को सलाह मिल सकती है और कोर्ट का समन भी दिया जा सकता है, जबकि मध्यम वर्ग के लोगों को जेल भेजा जा सकता है। जबकि, निचले तबकों के लिए सबसे बुरी स्थिति है, जो कि सजा के तौर पर जेल के साथ ही शारीरिक प्रताड़ना भी शामिल है। कुल मिलाकर गरीबों और आम लोगों की जिंदगी को नर्क बना दिया गया है।
महिलाओं की जिंदगी को बना दिया नर्क
तालिबान के ग्रुप के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा के द्वारा हस्ताक्षरित 90 पेज के डॉक्यूमेंट में स्पष्ट तौर पर एक सामाजिक खाई को बनाया गया है। इसमें सबसे अधिक ओहदा मुल्ला और मौलानाओं को दिया गया है। इसके बाद बाकी वर्ग के लोगों को रखा गया है। इसके अलावा महिलाओं को गुलामों के बराबर दर्जा दिया गया है। ‘दे महाकुमु जज़ाई ओसुलनामा’ नाम के इस कानून के तहत तथाकथित गुलाम मालिकों को अपनी पत्नियों या अपने नीचे के लोगों को सजा देने का प्रावधान है।

















