अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को गैर कानूनी करार दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल के नाम पर व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाना संविधान के अनुरूप नहीं है। यह फैसला उन टैरिफ के खिलाफ आया, जिन्हें नेशनल इमरजेंसी के तहत लागू किया गया था।
इस मामले को 12 अमेरिकी राज्यों और टैरिफ से प्रभावित कारोबारियों ने अदालत में चुनौती दी थी।
IEEPA के दायरे से बाहर बताया गया फैसला
निचली अदालतों ने पहले ही माना था कि ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत मिली शक्तियों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी आधार पर फैसला सुनाया।
अमेरिकी संविधान के अनुसार, टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को प्राप्त है। हालांकि 1977 में बने इस कानून का उपयोग पहले भी राष्ट्रपतियों ने किया है, लेकिन अधिकतर मामलों में इसका इस्तेमाल प्रतिबंध लगाने के लिए हुआ, न कि बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लागू करने के लिए।
व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल मानने पर सवाल
सुनवाई के दौरान रूढ़िवादी और उदारवादी दोनों विचारधाराओं के जजों ने सरकार की इस दलील पर सवाल उठाए कि व्यापार घाटा राष्ट्रीय आपातकाल की श्रेणी में आता है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि बढ़ता व्यापार घाटा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है। इसी आधार पर अप्रैल 2025 में व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर कई देशों पर भारी आयात शुल्क लगाया गया।
चीन, कनाडा और मेक्सिको पर लगाए गए थे जवाबी टैरिफ
ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ के तहत चीन, कनाडा और मेक्सिको समेत कई देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था। साथ ही फेंटानिल और अन्य अवैध दवाओं की तस्करी को भी राष्ट्रीय आपातकाल बताया गया।
लेकिन अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इमरजेंसी पावर के तहत इस तरह व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है।
राज्यों और कारोबारियों की बड़ी जीत
इस फैसले को उन राज्यों और व्यापारिक संगठनों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि IEEPA कानून में कहीं भी स्पष्ट रूप से टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है।
यह मामला ट्रंप की आर्थिक नीतियों का एक अहम हिस्सा था और सीधे देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा। फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया है कि आर्थिक नीतियों के मामले में राष्ट्रपति की शक्तियों की एक संवैधानिक सीमा है।
अमेरिकी व्यापार नीति पर दूरगामी असर
अमेरिका व्यापार नीति और ट्रंप टैरिफ विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य की नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिला है कि राष्ट्रीय आपातकाल की आड़ में बड़े आर्थिक फैसले लेने पर न्यायिक समीक्षा संभव है।
बरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका की व्यापार रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या कांग्रेस इस विषय पर कोई नया विधायी कदम उठाती है।

















