दिल्ली और पुणे लंबे समय से भारत के परफॉर्मिंग और विजुअल आर्ट्स के प्रमुख केंद्र रहे हैं। जहां दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) और मंडी हाउस रंगमंच की दुनिया के प्रतीक हैं, वहीं पुणे में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) सिनेमा शिक्षा का मजबूत स्तंभ है। इनके मुकाबले उत्तर भारत में फिल्म और थिएटर शिक्षा को लेकर सुगबुगाहट तो दिखी, लेकिन ठोस प्रगति कम ही हुई है। उत्तर प्रदेश में ‘वॉलीवुड’ बनाने की चर्चा कभी जोरों पर थी, पर अब वह फीकी पड़ चुकी है। नोएडा की फिल्म सिटी भी मुख्य रूप से समाचार चैनलों के कब्जे में है, जहां एंकर कभी-कभी समाचार से ज्यादा ‘फिल्मी’ अंदाज में नजर आते हैं।
रोहतक में डीएलसी सुपवा: एक नई उम्मीद
ऐसे समय में हरियाणा के रोहतक में स्थित दादा लखमी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) एक नई उम्मीद की तरह उभर रहा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से महज 85 किलोमीटर दूर स्थित यह विश्वविद्यालय मोदी सरकार की उम्र जितना पुराना है- 2014 से अस्तित्व में आया। हरियाणा सरकार के अधीन यह संस्थान ‘कला साधना परम दैवतम्’ के ध्येय वाक्य के साथ चल रहा है। 36 एकड़ में फैला यह परिसर प्रसिद्ध आर्किटेक्ट राज रेवाल द्वारा डिजाइन किया गया है और इसके निर्माण में करीब 300 करोड़ रुपये खर्च हुए।
शैक्षणिक देरी और प्रशासनिक चुनौतियां
पिछले वर्षों तक सुपवा की स्थिति निराशाजनक रही। फिल्म और टेलीविजन विभाग में शैक्षणिक देरी आम थी, उपकरणों की कमी, संकाय की कमी और प्रशासनिक कुप्रबंधन के कारण छात्र प्रभावित हुए। उदाहरणस्वरूप, 2017-2021 का चार वर्षीय बैच 2024 में ही डिग्री पूरा कर सका, जबकि 2018-2022 बैच के छात्रों को 2025 या 2026 तक इंतजार करना पड़ सकता है। 2016 से 2023 तक कई विरोध प्रदर्शन हुए, और 2024 में दो महीने से अधिक चला एक बड़ा आंदोलन शैक्षणिक वातावरण को और प्रभावित कर गया।
2025: बदलाव का टर्निंग पॉइंट
लेकिन 2025 एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। मई 2025 में डॉ. अमित आर्य ने छठे कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला। एक प्रतिष्ठित पत्रकार और मीडिया रणनीतिकार के रूप में जाने जाने वाले डॉ. आर्य ने तुरंत सुधारों की शुरुआत की। अप्रैल 2025 में ही हरियाणा सरकार ने सुपवा को राज्य की सभी यूनिवर्सिटीज में फिल्म मेकिंग कोर्स शुरू करने के लिए मेंटर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। साथ ही, पंचकूला में 100 एकड़ सरकारी जमीन पर फिल्म सिटी और गुरुग्राम में फिल्म सिटी के लिए जमीन चिह्नित करने का काम शुरू हुआ। इससे हरियाणा में परफॉर्मिंग और विजुअल आर्ट्स की हवा बदलने लगी है।
‘सारंग’ और ‘भारंगम’ महोत्सव: पुनरुत्थान का प्रतीक
डॉ. आर्य ने देखा कि विश्वविद्यालय का पुराना ‘सारंग’ महोत्सव बंद पड़ा था। उन्होंने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया और एनएसडी के साथ साझेदारी में इसे राष्ट्रीय स्तर पर लाने का प्रयास किया। फरवरी 2026 में आयोजित तीन-चार दिवसीय ‘सारंग’ और ‘भारंगम’ (भारत रंग महोत्सव का 25वां संस्करण) महोत्सव इसी की मिसाल है। यह महोत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि सुपवा के पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया।
महोत्सव की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता
महोत्सव की शुरुआत प्रभु वंदना से हुई, जहां असम के शास्त्रीय नृत्य में कृष्ण लीलाओं का मंचन हुआ। म्यूजिक बैंड ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। श्रीलंका की टीम ने ‘कोलम्बा हाथे थोराना’ नाटक प्रस्तुत किया, जो इंसानी रिश्तों की नाजुकता को दिखाता है। सिंहली भाषा में मंचित इस नाटक में प्रोजेक्टर पर सबटाइटल्स के बावजूद अभिनय इतना प्रभावशाली था कि भाषा बाधा नहीं बनी। नाटक प्यार, शादी और संघर्ष के तीन भागों में बंटा था, जिसमें संगीत, शारीरिक अभिव्यक्ति और अभिनय का अनोखा संगम था।
समापन समारोह और चर्चित हस्तियों की मौजूदगी
समापन समारोह में पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अवधी गीतों से माहौल बांधा। उन्होंने छात्रों को ग्रामीण शादी-विवाह के गीतों में स्वाभाविक अभिनय की मिसाल दी और कहा कि अभिनय आत्मा से निकलता है, बनावटी नहीं। ‘ना आना इस देश लाडो’ फेम अभिनेत्री मेघना मलिक मंच पर डांस करने पहुंच गईं। बॉलीवुड के सुनील चितकारा, विक्रम कोचर और सनसनी फेम श्रीवर्धन त्रिवेदी भी मौजूद रहे।
विविध प्रस्तुतियां और राष्ट्रीय सहभागिता
महोत्सव में दिल्ली, पंजाब और श्रीलंका से नाटक मंचित हुए। एनएसडी की 107 सदस्यीय टीम शामिल हुई। सुपवा के 50 छात्रों ने कथक, भरतनाट्यम, भांगड़ा, कव्वाली, बॉडी मूवमेंट थिएटर आदि प्रस्तुत किए। पार्थ हजारिका ग्रुप ने ‘सत्त्रिया की आत्मा’ नृत्य से कृष्ण भक्ति को जीवंत किया। सुधीर रेखरी बैंड की प्रस्तुति ने संगीत की धुन पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया।
अंतिम सत्र और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
अंतिम दिन सुबह के सत्र में भारतीय चित्र साधना फिल्म महोत्सव के संयोजक नरेंद्र ठाकुर, इंडिया चिल्ड्रन फाउंडेशन के हेड अनिल पांडे, एबीवीपी के संगठन मंत्री संजय कुशवाहा, अभिनेत्री सुमित्रा हुड्डा पेडनेकर, फिल्म निर्देशक अतुल गंगवार मौजूद रहे।
भविष्य की दिशा और नई पहचान
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने महोत्सव के लिए शुभकामनाएं भेजीं और भविष्य में खुद शामिल होने की इच्छा जताई। महोत्सव को सफल बनाने में 60 से अधिक वॉलंटियर्स और पूरा सुपवा परिवार जुटा।
डॉ. अमित आर्य के नेतृत्व में सुपवा अब सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि कला के उत्सव का केंद्र बन रहा है। आगे बड़े आयोजनों का रोडमैप तैयार है। जहां पहले विरोध और देरी की खबरें थीं, अब सफलता और रचनात्मकता की कहानियां गूंज रही हैं। दिल्ली-एनएसडी की तर्ज पर सुपवा हरियाणा और उत्तर भारत के लिए नया कला केंद्र बन सकता है।











