सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति में देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अलंकरण सम्मान, CM मोहन यादव ने की ऐतिहासिक घोषणा
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सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति में देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अलंकरण सम्मान, CM मोहन यादव ने की ऐतिहासिक घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा रविवार की रात महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन में विक्रमोत्सव-2026 का शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए की।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Mahak Singh
Feb 16, 2026, 06:08 pm IST
inमध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और उनके शौर्य, न्याय तथा प्रजावत्सल आदर्शों को अमर बनाने के लिए उनकी स्मृति में एक करोड़ एक लाख रुपये का सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्टीय अलंकरण सम्मान स्थापित करने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा रविवार की रात महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन में विक्रमोत्सव-2026 का शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि यह देश का सबसे प्रतिष्ठित अलंकरण भारत की सांस्कृतिक गरिमा को विश्व मंच पर नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और 5-5 लाख रुपये की तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी स्थापित करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में 139 दिवसीय विक्रमोत्सव-2026 का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उज्जैन ने सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति की ज्योति प्रज्ज्वलित की है। विरासत से विकास के इस प्रतीक के रूप मे ही उज्जैन में विक्रमोत्सव का सांस्कृतिक महापर्व आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक उत्सव नहीं बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और ऐतिहासिक स्वाभिमान का विराट पर्व है।

विक्रमादित्य: सुशासन और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

उन्होंने कहा कि महान सम्राट विक्रमादित्य ने न्याय, सुशासन और लोक कल्याण की ऐसी परंपरा स्थापित की जो आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका शासन काल विद्या, विज्ञान, ज्योतिष और साहित्य के स्वर्णिम युग के रूप में विश्व में विख्यात रहा है। विक्रम संवत और भारतीय काल गणना हमारे वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक समृद्धि का गौरवशाली प्रतीक है। उज्जैन का सांस्कृतिक आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजन- विक्रमोत्सव हमारी परंपरा को नई ऊर्जा देगा। प्रदेश भर में गांव, शहर, कस्बों तक विक्रमोत्सव का विस्तार करते हुए प्रदेश में हो रहे सभी शिवरात्रि मेलों को इस आयोजन से जोड़ा गया है।

सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और विक्रमोत्सव की वैश्विक ख्याति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन की कीर्ति का वैभव संपूर्ण विश्व में छाया था। सम्राट विक्रमादित्य का दरबार नवरत्नों से संपन्न था। उन्होंने शकों को परास्त किया और तुर्कमेनिस्तान से आगे यूरोप तक सनातन संस्कृति का विस्तार किया। साथ ही विक्रम संवत के माध्यम से सुशासन की नई मिसाल स्थापित की। सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का वर्णन चीनी यात्रा व्हेन सांग और अरबी इतिहासकार अलबरूनी के उल्लेखों में मिलता है। उन्होंने कहा कि विक्रमोत्सव की ख्याति तेजी से बढ़ रही है। प्रसन्नता का विषय है कि वर्ष-2024 के विक्रमोत्सव को एशिया का बिगेस्ट रिलीजियस फेस्टीवल का अवार्ड मिला। विक्रमोत्सव-2025 को ईमैक्सम ग्लोबल अवार्ड द्वारा ‘लांगस्टैडिंग आईपी ऑफ द इयर’ से सम्मानित किया गया। इस वर्ष और आने वाले समय में भी विक्रमोत्सव अपनी उत्सवधर्मी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया में स्थापित करेगा।

उज्जैन का तेज विकास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन पृथ्वी का नाभि स्थल कहा जाता है। सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की अस्था इसे सनातन के विश्वास का केंद्र भी बनाती है। इसी दिव्य परम्परा को अधिक भव्य व्यवस्थित और श्रद्धालु केंद्रित बनाने के लिए सिंहस्थ की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उज्जैन तथा आसपास के क्षेत्रों में विकास के कार्य तेजी से जारी हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए उज्जैन के आसपास फोर लेन और सिक्स लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। शिप्रा नदी में स्नान के लिए 30 किमी घाटों की व्यवस्था की गई है। मोक्षदायनी शिप्रा नदी को निर्मल और विरल बनाए रखने के लिए व्यवस्थित कार्य योजना प्रगति पर है।

भारतीय काल गणना, सांस्कृतिक चेतना और विकास का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैनी काल गणना का केंद्र रही है। हमारे सभी त्यौहार मंगल तिथियों पर आते हैं जो विक्रम संवत पर आधारित हैं। अत: हमारी संस्कृति से जुड़े त्यौहारों और पर्वों पर शुभकामनाओं के आदान-प्रदान के स्थान पर मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान करने की परम्परा स्थापित की जाए। उन्होंने कहा कि ग्रीनविच के स्थान पर भारतीय काल गणना परम्परा को स्थापित करने के उद्देश्य से ही विक्रमादित्स वैदिक घड़ी का साक्षात्कार सभी से कराया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास का कारवां निरंतर अग्रसर है। उनके मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी किसान, युवा, महिला और गरीब सभी के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उद्योग व्यवसाय, उद्यमिता और कृषि के क्षेत्र में भी निरंतर गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। वर्ष-2025 को उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाते हुए रीवा, सागर नर्मदापुरम, ग्वालियर, सिंगरौली जैसे स्थानों पर क्षेत्रीय समिट आयोजित की गईं, जिसके समारात्मक परिणाम प्राप्त हुए। वर्ष-2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। सभी के कल्याण और विकास का यह काल रामराज्य और सम्राट विक्रमादित्य के समान है।

कार्यक्रम को विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि 139 दिवसीय विक्रमोत्सव में 41 से अधिक सांस्कृति, आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजन होंगे। विक्रामोत्सव 2026 का आयोजन संस्कृति विभाग, विक्रमादित्य शोध पीठ और जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। देश की सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत से परिचित कराने वाले विक्रमोत्सव के लिए उज्जैन सहित संपूर्ण प्रदेश में उत्साह और उल्लास का वातावरण है। इस बहुरंगी महोत्सव में प्रदर्शनी, कलश यात्रा, संगीत संध्या, विक्रम व्यापार मेले सहित अकादमिक-सत्र भी होंगे।

Topics: Indian Cultural Festival
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