बांग्लादेश में हुए आम चुनावों में कट्टरपंथ एक बार फिर से जीतता दिख रहा है। इन चुनावों के अब तक के नतीजों को देखें तो पूर्व प्रधानमंत्री खालेदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) बड़े जीत की ओर बढ़ रही है। जबकि जमात-ए-इस्लामी पीछे रह गई है। मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली सरकार पहले ही शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध लगा रखा है।
बांग्लादेश में हाल ही में संसदीय चुनाव हुए हैं, जो 2024 के ‘जुलाई विद्रोह’ के बाद पहला बड़ा राष्ट्रीय चुनाव था। इस विद्रोह ने लंबे समय तक प्रधानमंत्री रह चुकीं शेख हसीना और उनकी अवामी लीग सरकार को सत्ता से हटा दिया था। उसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। अब ये चुनाव उस अंतरिम सरकार की जगह नई स्थायी सरकार चुनने के लिए हुए। खास बात ये है कि अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया, और पहली बार 30 साल में बैलट पेपर पर उनकी नाव वाला चुनाव चिन्ह नहीं दिखा। वोटिंग हुई तो टर्नआउट सिर्फ 47% रहा।
बीएनपी की मजबूत बढ़त
बीएनपी, जिसकी अध्यक्षता तारिक रहमान (खालेदा जिया के बेटे) कर रहे हैं, गिनती के दौरान बहुत आगे निकल गई है। गुरुवार रात तक के आंकड़ों में बीएनपी ने 300 में से 120 सीटें जीत लीं और 55 सीटों पर आगे चल रही थी। यानी कुल मिलाकर वो 175 सीटों के करीब पहुंच गई, जबकि बहुमत के लिए 151 सीटें चाहिए। ये आंकड़े आधे रास्ते (150 सीटें) को पार करने की ओर इशारा कर रहे हैं। तारिक रहमान ने खुद बोगरा और ढाका-17 दोनों सीटों से जीत हासिल की है। ऐसे में वो अगले प्रधानमंत्री बनने की सबसे मजबूत दावेदारी में हैं।
जमात-ए-इस्लामी का पिछड़ना
बीएनपी का मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी और उसके साथी दलों से था। लेकिन जमात काफी पीछे रह गई। उनके गठबंधन को सिर्फ 38 सीटें मिलीं या उन पर आगे दिख रही थीं। जमात को बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी माना जाता है, लेकिन इस बार वो बीएनपी से काफी दूर रह गई।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक बदलाव
ये चुनाव बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला रहा है। पहले कई सालों तक शेख हसीना (अवामी लीग) और खालेदा जिया (बीएनपी) के बीच ही मुख्य मुकाबला रहता था। खालेदा जिया, जो पूर्व प्रधानमंत्री थीं, पिछले साल दिसंबर में गुजर गईं। उनकी मौत के बाद भी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ढाका में उनके अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया, जो भारत और बीएनपी के बीच नए संपर्क का संकेत था। बीएनपी को पहले भारत के प्रति कम दोस्ताना माना जाता था, क्योंकि अवामी लीग भारत के साथ करीबी रही है। लेकिन अब बीएनपी ने अपना रुख कुछ नरम कर लिया है।
नई सरकार लेगी अंतरिम सरकार की जगह
चुनाव के बाद नई सरकार बनेगी जो यूनुस की अंतरिम सरकार की जगह लेगी। बीएनपी की जीत लगभग तय दिख रही है, और जमात विपक्ष में रह सकती है। गिनती गुरुवार आधी रात तक जारी थी, और बीएनपी ने जमात पर निर्णायक बढ़त बना ली थी।

















