रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। 13 फरवरी 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी। यह डील इतनी बड़ी है कि इसे स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी रक्षा सौदे की संभावना बताई जा रही है –’मदर ऑफ ऑल डिफेंस डील्स’। यह फैसला फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक 5 दिन पहले आया है।
डील के मुख्य तथ्य
कुल 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर जेट्स खरीदने की मंजूरी मिली है। ये विमान डसॉल्ट एविएशन से लिए जाएंगे। भारतीय वायुसेना (IAF) के पास अभी 36 राफेल हैं। इस डील के बाद कुल 150 राफेल हो जाएंगे।
खास बात ये है कि ज्यादातर विमान भारत में ही बनेंगे। करीब 20 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे आएंगे और 2030 तक IAF में शामिल हो जाएंगे। बाकी 90-94 विमान हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और डसॉल्ट के साथ मिलकर भारत में बनाए जाएंगे। इसमें 50-60% तक स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा फायदा हो सकता है।
लागत और स्केल
इस 114 राफेल की अनुमानित कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि अंतिम कीमत नेगोशिएशन के बाद तय होगी – इसमें हथियारों का पैकेज, सपोर्ट और अन्य डिटेल्स शामिल होंगी। DAC ने कुल मिलाकर 3.6 लाख करोड़ रुपये की कई डील्स को मंजूरी दी, जिसमें राफेल के अलावा अन्य चीजें भी हैं। यह राशि कई वित्तीय वर्षों में खर्च होगी।
अन्य मंजूरियां
DAC ने सिर्फ राफेल ही नहीं, बल्कि कई और जरूरी चीजों को भी हरी झंडी दी:
- नौसेना के लिए 6 P-8I पोसाइडन लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम रेकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट से)।
- कॉम्बैट मिसाइल्स, एंटी-टैंक माइंस, T-72 टैंक्स का ओवरहॉल, BMP-II इन्फैंट्री व्हीकल्स आदि आर्मी के लिए।
- कोस्ट गार्ड के लिए डोर्नियर एयरक्राफ्ट में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इन्फ्रा-रेड सिस्टम।
- हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट और 4-MW मरीन गैस टरबाइन जनरेटर।
क्यों इतनी जरूरत?
IAF के पास अभी 42 स्क्वाड्रन्स की स्वीकृत संख्या के मुकाबले करीब 29 स्क्वाड्रन्स कम हैं। पाकिस्तान और चीन से बढ़ते खतरे के बीच एयर डोमिनेंस, लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक और डिटरेंस के लिए राफेल जैसे 4.5 जेनरेशन फाइटर बहुत जरूरी हैं। पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने पाकिस्तान के टेरर कैंप्स और मिलिट्री बेस पर सटीक हमले किए थे, जिसे IAF वाइस-चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने “ऑपरेशन सिंदूर हीरो” कहा।
डसॉल्ट एविएशन के साथ होगी तकनीकी नेगोसिएशन
अभी यह सिर्फ आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) है। अब डसॉल्ट एविएशन के साथ कमर्शियल और टेक्निकल नेगोशिएशन होंगे। हथियार पैकेज, कीमत और अन्य शर्तें फाइनल होंगी। उसके बाद कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम मंजूरी लेकर कॉन्ट्रैक्ट साइन होगा। यह डील IAF की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को भी मजबूत करेगी।













