कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ न केवल बयानबाजी कर रहे हैं। बल्कि, हाल ही में अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील को लेकर भी झूठ फैला रहे हैं। इस पर अब भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता खत्म करने और उन्हें उम्र भर चुनाव लड़ने से रोकने की मांग वाली एक सबस्टैंटिव मोशन पेश की।
क्या है मामला?
कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश को गुमराह कर रहे हैं और ऐसा वे “एंटी-इंडिया फोर्सेस” की मदद से कर रहे हैं। खास तौर पर उन्होंने जॉर्ज सोरोस का नाम लिया, जिन्हें वे देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों में से एक बता रहे हैं। दुबे का कहना है कि राहुल गांधी विदेशी संस्थाओं जैसे सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन, USAID के साथ जुड़कर काम करते हैं। वे थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, अमेरिका जैसे देशों में जाते हैं और वहां “एंटी-इंडिया एलिमेंट्स” के साथ मिलकर काम करते हैं।
दुबे ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने लोकसभा में आज राहुल गांधी के खिलाफ मोशन दिया है कि वे सोरोस जैसी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। मैंने मांग की है कि उनकी सदस्यता खत्म की जाए और उन्हें जीवन भर चुनाव लड़ने से रोका जाए।”
यह मोशन क्यों आई?
यह कदम राहुल गांधी के लोकसभा में दिए एक भाषण के ठीक एक दिन बाद आया। राहुल ने सरकार पर आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका के बीच हुए इंटरिम ट्रेड डील और ऊर्जा-वित्तीय मामलों में अमेरिका की वजह से भारत के हितों से समझौता हुआ है। उन्होंने कहा था कि दुनिया में अब एक ही सुपरपावर का दौर खत्म हो गया है, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं, ऊर्जा और फाइनेंस को हथियार बनाया जा रहा है, लेकिन सरकार अमेरिका के दबाव में आकर भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को खतरे में डाल रही है। राहुल ने पूछा था – “क्या आपको शर्म नहीं आती?”
कांग्रेस की तरफ से क्या प्रतिक्रिया?
प्रियंका गांधी ने इस मोशन को खारिज करते हुए कहा कि राहुल पर चाहे जितने प्रिविलेज नोटिस, FIR या केस करें, उन पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे किसानों को धोखा दे रहे हैं, ट्रेड डील से किसानों को नुकसान होगा। साथ ही लेबर यूनियनों की हड़ताल का समर्थन भी किया। राहुल गांधी ने खुद इस मोशन पर हल्के में टिप्पणी की – “क्या वे आपको कुछ कीवर्ड्स देते हैं?”
अभी लोकसभा में इस पर चर्चा होनी है बाकी
यह सिर्फ एक नोटिस या मोशन है, अभी लोकसभा में इस पर चर्चा हुई नहीं है और न ही कोई फैसला आया है। ऐसे प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का फैसला स्पीकर और हाउस की कार्यवाही पर निर्भर करता है। राजनीतिक रूप से यह बीजेपी और कांग्रेस के बीच तनाव को और बढ़ाता दिख रहा है, खासकर बजट सेशन के दौरान। यह राजनीति का एक और दौर है जहां आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, लेकिन असल फैसला लोकसभा की कार्यवाही और कानूनी प्रक्रिया से होगा।

















