देहरादून: देवभूमि राजधानी देहरादून से हिमाचल, चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा जाने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। पांवटा-बल्लुपुर हाईवे का काम फरवरी तक पूरा हो जाएगा। हालांकि, इस पर गाड़ियां दौड़नी शुरू हो गई हैं। इससे न केवल दूरी सात किमी कम हुई है, बल्कि अब आप प्रेमनगर से पांवटा का डेढ़ घंटे का सफर 35 मिनट का हो गया है। इस नए हाईवे पर छोटे वाहन 80 और भारी वाहन 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रहे हैं।
पांवटा से बल्लूपुर हाईवे के लिए 2022 में 1600 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। इस परियोजना का काम दो सेक्शन में हुआ है। पहला सेक्शन पांवटा से मेदनीपुर गांव (18 किमी) और दूसरा मेदनीपुर से बल्लूपुर (26 किमी) है। दोनों सेक्शन का काम लगभग पूरा होने वाला है। पहले सेक्शन में यमुना पर बने पुल से हिमाचल की तरफ एप्रोच रोड का काम शेष है, जबकि दूसरे सेक्शन में प्रेमनगर में ओवरब्रिज का काम बचा हुआ है। यहां प्रेमनगर-झाझरा के बीच रोटरी का काम भी चल रहा है। प्रोजेक्ट के फरवरी तक पूर्ण होने की उम्मीद है।
आबादी क्षेत्रों के लिए बाईपास
पुरानी सड़क घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती थी, जिससे जाम एक बड़ी चुनौती बन गया था। इसे हल करने के लिए 25 किमी का नया बाईपास हाईवे तैयार किया गया है। इससे पांवटा से सहसपुर, हरबर्टपुर, सेलाकुई और झाझरा जैसे भारी आबादी वाले क्षेत्र बाईपास हो गए हैं। इस मार्ग पर नौ अंडरपास और रोटरी बनाई गई एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ सिंह ने बताया कि हाईवे पर नौ अंडरपास बनाए गए हैं। आबादी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए झाझरा और मेदनीपुर जैसे स्थानों पर रोटरी बनाई गई है। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कॉरिडोर भी बनाए गए हैं।
हाईवे पर सफर में खतरा भी कम नहीं
पांवटा-बल्लूपुर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही तो शुरू हो गई है, लेकिन इस हाईवे पर भी हरिद्वार-देहरादून हाईवे जैसी तकनीकी कमियां और सुरक्षा संबंधी चूक नजर आने लगी हैं। आबादी क्षेत्रों में कई जगह डिवाइडर के बीच ‘कट’ छोड़ दिए गए हैं, जो भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। एनएचएआई के अधिकारियों का तर्क है कि ये कट स्थानीय लोगों की मांग पर छोड़े गए हैं, जिन्हें बाद में जिला प्रशासन के सहयोग से बंद करवाया जाएगा। राष्ट्रीय राज मार्ग अधिकारियों के अनुसार ये मार्ग आगे हरिद्वार खटीमा राष्ट्रीय राज मार्ग से भी जुड़ जाएगा।













