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ओडिशा ने माओवादी समर्पण नीति कड़ी की, पात्रता मानदंड स्पष्ट

अधिकारियों के अनुसार, पूर्व नीति में स्पष्ट पात्रता मानदंडों का अभाव था, जिससे पड़ोसी राज्यों के कैडरों द्वारा अधिक वित्तीय प्रोत्साहन का लाभ उठाने की आशंका थी।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Feb 11, 2026, 03:11 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने माओवादियों के समर्पण एवं पुनर्वास नीति में संशोधन करते हुए पात्रता मानदंड को स्पष्ट कर दिया है, ताकि लाभ केवल उन्हीं कैडरों को मिले जिनका संचालनात्मक संबंध राज्य से रहा हो। यह कदम 27 नवंबर 2025 को घोषित व्यापक ढांचे से एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, जिन माओवादियों की गतिविधियां ओडिशा से संबंधित नहीं हैं, वे योजना के लाभ के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, किसी भी राज्य के वे माओवादी जो ओडिशा में सक्रिय रहे हैं, इस नीति के अंतर्गत लाभ ले सकेंगे। ओडिशा के मूल निवासी, जो राज्य से बाहर सक्रिय रहे हैं, वे भी समर्पण कर सकते हैं, बशर्ते संबंधित पुलिस अधीक्षक उनकी संलिप्तता प्रमाणित करें और जिस राज्य में वे सक्रिय थे वहां से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त हो, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें वहां पुनर्वास लाभ नहीं मिला है।

अधिकारियों के अनुसार, पूर्व नीति में स्पष्ट पात्रता मानदंडों का अभाव था, जिससे पड़ोसी राज्यों के कैडरों द्वारा अधिक वित्तीय प्रोत्साहन का लाभ उठाने की आशंका थी। ओडिशा का पैकेज छत्तीसगढ़ की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक इनाम राशि प्रदान करता है, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मजबूत पात्रता मानदंडों के अभाव में यह योजना वास्तविक डिरेडिकालाइजेशन के बजाय इनाम प्रणाली में बदलने का जोखिम उठा रही थी। संशोधित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य केवल वास्तविक रूप से ओडिशा में सक्रिय माओवादियों को लाभ देना है।

गत नवंबर में संशोधित नीति के तहत समर्पित माओवादियों को श्रेणी ‘ए’ (उच्च पदस्थ सदस्य) और श्रेणी ‘बी’ (मध्य व निम्न स्तर के कैडर) में विभाजित किया गया है। श्रेणी ‘ए’ को 5 लाख रुपये और श्रेणी ‘बी’ को 2.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। हथियार समर्पण पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाता है, जिसमें लाइट मशीन गन पर 4.95 लाख रुपये तथा प्रति कारतूस 55 रुपये तक का प्रावधान है। संशोधित नीति लागू होने के बाद अब तक 45 माओवादियों ने समर्पण किया है, जिनके लिए लगभग 6.5 करोड़ रुपये के लाभ स्वीकृत हुए हैं। इसमें करीब 4.5 करोड़ रुपये इनामी राशि तथा लगभग 2 करोड़ रुपये त्वरित नकद प्रोत्साहन और हथियार समर्पण पर पुरस्कार के रूप में शामिल हैं। इसी माह 19 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

हाल ही में वरिष्ठ माओवादी दंपती निखिल और इंदु सहित 17 अन्य कैडरों के रायगडा और कंधमाल जिलों में समर्पण से संगठन की राज्य में मौजूदगी काफी कमजोर हुई है। वर्तमान में माओवादी गतिविधियां मुख्यतः कंधमाल-रायगढ़ा-कालाहांडी त्रिकोण क्षेत्र तथा बलांगीर के गंधमर्दन पहाड़ियों तक सीमित रह गई हैं।

19 जनवरी से ओडिशा पुलिस ने चरणबद्ध तरीके से नुआपाड़ा, नबरंगपुर, मलकानगिरी, कोरापुट और बौध जिलों को नक्सलमुक्त घोषित किया है। एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीव पांडा ने बताया कि राज्य में अब 50 से भी कम माओवादी सक्रिय हैं। इनमें सीपीआई (माओवादी) के राज्य समिति सदस्य सुकुर उर्फ कृष्णा (49), जो मलकानगिरी के मूल निवासी हैं और वर्तमान में कंधमाल में सक्रिय हैं, शामिल हैं। पांडा ने कहा, अब केवल मुट्ठीभर कैडर शेष हैं। अभियान तेज करने और समर्पण की अपील के साथ हमें आने वाले दिनों में और आत्मसमर्पण की उम्मीद है। ओडिशा ने पहली बार 2006 में समर्पण एवं पुनर्वास नीति लागू की थी। 2006 से 2025 के बीच 610 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 2024 में 24 और 2025 में 29 शामिल हैं। केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च तक देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने की समयसीमा के मद्देनजर ओडिशा ने सख्त अभियान और आकर्षक पुनर्वास प्रोत्साहनों की दोहरी रणनीति अपनाई है।

Topics: governmentOdishaMaoist Surrender and Rehabilitation Policy
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