हाल ही में रूस में एक चाकूबाजी की घटना में चार भारतीय छात्र घायल हो गए, जिसके बाद वहां पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की मुश्किलें फिर से चर्चा में आ गई हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशों में भारतीय छात्रों की शिकायतों में से आधे से ज्यादा मामले रूस से ही आ रहे हैं। ये शिकायतें शोषण, उत्पीड़न और नस्लीय भेदभाव जैसी गंभीर बातों को लेकर हैं।
कितनी शिकायतें आईं?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में पूरी दुनिया में भारतीय छात्रों ने करीब 350 शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें से 200 से ज्यादा, यानी 50% से अधिक, सिर्फ रूस से आईं। मॉस्को इस मामले में सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बताया जा रहा है। तुलना के लिए देखें तो 2023 में रूस से सिर्फ 68 शिकायतें थीं, 2024 में 78, लेकिन 2025 में ये संख्या अचानक 201 तक पहुंच गई। यानी एक साल में काफी उछाल आया है।
किन-किन देशों से शिकायतें?
शिकायतें कुल 196 देशों से आई हैं, लेकिन रूस का हिस्सा सबसे बड़ा है। बाकी देशों का अलग से ब्रेकडाउन नहीं दिया गया, लेकिन साफ है कि रूस सबसे आगे है। खासकर मेडिकल (MBBS) पढ़ने वाले छात्रों की शिकायतें ज्यादा हैं, जो राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से जाते हैं।
किस तरह की परेशानियां?
छात्रों को मुख्य रूप से शोषण, उत्पीड़न और नस्लीय का सामना करना पड़ रहा है। दूसरे देशों के छात्रों से भेदभाव, यूनिवर्सिटी की तरफ से मानसिक उत्पीड़न जैसे निष्कासन की धमकियां छोटी-मोटी बातों पर। नस्लीय प्रोफाइलिंग, मौखिक दुर्व्यवहार और संस्थानों से कोई सपोर्ट नहीं मिलना आम बात हो गई है। बैश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट कनिष्का के. ने बताया कि छठे साल में हॉस्टल की किचन में छोटी सी बहस पर विदेशी छात्रों ने भारतीय छात्रों पर चाकू से हमला किया और धमकियां दीं।
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उन्होंने कहा कि ऐसी कई घटनाएं रिपोर्ट ही नहीं होतीं क्योंकि छात्र निष्कासन, जवाबी कार्रवाई, वीज़ा संबंधी समस्याएं या इमिग्रेशन की चिंता से डरते हैं। रूसी नियमों के मुताबिक, किसी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों की सीमा करीब 200 है, लेकिन कुछ जगहों पर 1,200 से ज्यादा एडमिशन ले लिए जाते हैं और बाद में निकाल दिया जाता है। इससे छात्रों को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान होता है। सभी एफएमजी के कोऑर्डिनेटर डी. कौशल ने कहा कि शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, छात्र चुपचाप सहते रहते हैं।
2022 के बाद रुझान बदला
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से MBBS के लिए रूस जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कम से कम 50% की कमी आई है। FMGs एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट मनोज कुमार ने बताया कि सुरक्षा की चिंता और पढ़ाई में अनिश्चितता के कारण छात्र अब कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों की तरफ ज्यादा जा रहे हैं।
MEA क्या कर रही है?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि सभी भारतीय मिशनों में खास अधिकारी तैनात हैं जो छात्रों के शिक्षा और कल्याण के मामलों को देखते हैं। मिशन नियमित रूप से छात्रों से संपर्क में रहते हैं, उन्हें चुनौतियों और खतरों के बारे में बताते हैं। राजदूत और सीनियर अधिकारी यूनिवर्सिटीज में जाकर छात्रों और उनके एसोसिएशन से मिलते हैं। ये जानकारी राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने दी है।











