सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के एक संवेदनशील विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें थिरुप्परनकुंद्रम दरगाह में रोजाना नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस दरगाह में रोजाना नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, बल्कि केवल रमजान, बकरीद और अन्य विशेष अवसरों पर ही नमाज अदा करने की अनुमति होगी।
दरगाह में रोजाना नमाज और बलि की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका- यह मामला मदुरै के पास स्थित ऐतिहासिक थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी से जुड़ा हुआ है। यह पहाड़ी भगवान मुरुगन के प्राचीन मंदिर के लिए जानी जाती है, जिसे अरुपदाई वीदु यानी मुरुगन के छह प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। इसी पहाड़ी पर सिकंदर बादुशा की दरगाह भी स्थित है। लंबे समय से इस क्षेत्र को लेकर विवाद चला आ रहा है कि दरगाह में रोजाना नमाज की अनुमति दी जाए या नहीं। इस मामले में इमाम हुसैन नाम के एक प्रैक्टिसिंग मुस्लिम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मांग की थी कि दरगाह को मस्जिद की तरह इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए और वहां रोजाना पांच वक्त की नमाज पढ़ने दी जाए। इसके साथ ही उर्स और अन्य मौकों पर पशु बलि की भी अनुमति मांगी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा- सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार शामिल थे, ने मामले की गहन सुनवाई की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के फैसले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से भगवान मुरुगन मंदिर परिसर का हिस्सा रहा है और यहां रोजाना नमाज की कोई पुरानी परंपरा नहीं रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है और वहां की स्थापित परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी नई धार्मिक प्रथा को जबरन लागू करने से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है, इसलिए ऐसा करना उचित नहीं है।
नमाज और बलि पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक- सुप्रीम कोर्ट ने न केवल रोजाना नमाज की मांग को खारिज किया, बल्कि दरगाह परिसर में पशु बलि पर लगी रोक को भी सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यह स्थान सभी धर्मों के लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र हो सकता है, लेकिन इसे किसी एक समुदाय के लिए पूरी तरह मस्जिद में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा था कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि यहां रोजाना नमाज पढ़ने की परंपरा रही है। हिंदू संगठनों और मंदिर प्रशासन ने इस मांग का कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि यह पूरा क्षेत्र भगवान मुरुगन मंदिर की भूमि का हिस्सा है। यह स्थान मूल रूप से मंदिर से जुड़ा हुआ रहा है। इस फैसले के बाद अब थिरुप्परनकुंड्रम दरगाह में केवल विशेष अवसरों पर ही नमाज अदा की जाएगी और पशु बलि पर रोक जारी रहेगी।















