चंद्रयान-4: भारत का पहला चंद्रमा सैंपल रिटर्न मिशन – सुरक्षित लैंडिंग साइट MM-4 मिली
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चंद्रयान-4: भारत का पहला चंद्रमा सैंपल रिटर्न मिशन – सुरक्षित लैंडिंग साइट MM-4 मिली

चंद्रयान-4 में 2-3 किलो चंद्रमा के सैंपल लाए जाएंगे। SAC इसरो ने MM-4 साइट चुनी जहां ढलान कम, रोशनी अच्छी और पानी-बर्फ के निशान संभव। मिशन 2027-2028 में लॉन्च हो सकता है – जानें मॉड्यूल और चुनौतियां।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Feb 9, 2026, 08:39 am IST
inभारत, विज्ञान और तकनीक

इसरो ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए एक अहम कदम आगे बढ़ाया है। स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (SAC) के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव इलाके में लैंडिंग के लिए एक सुरक्षित जगह ढूंढ ली है। यह जगह लगभग 1 वर्ग किलोमीटर की है और काफी समतल है। इस खोज से मिशन की प्लानिंग को मजबूती मिली है।

यह जानकारी चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से ली गई हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरों पर आधारित है। जिन वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया, उनमें अमिताभ, सुरेश के., अजय के. पाराशर, कनन वी. अय्यर, अब्दुल एस., श्वेता वर्मा त्रिवेदी और नितांत दुबे शामिल हैं। उन्होंने इलाके की ढलान, छाया, बड़े गड्ढे और पत्थरों का बारीकी से विश्लेषण किया।

लैंडिंग साइट की खास बातें

चुनी गई जगह का नाम एमएम-4 है। इसका स्थान लगभग 84.289° अक्षांश और 32.808° देशांतर पर है। यहां की औसत ढलान सिर्फ 5 डिग्री के आसपास है, जो लैंडर के लिए काफी सुरक्षित है। बड़े गड्ढे या पत्थर बहुत कम हैं, जिससे लैंडिंग के दौरान नुकसान का खतरा कम रहता है। सूरज की रोशनी भी अच्छी मिलती है– कम से कम 11-12 दिनों तक। इलाका शिव-शक्ति पॉइंट से ज्यादा दूर नहीं है, जहां चंद्रयान-3 उतरा था।

यहां पानी या बर्फ के निशान मिलने की संभावना है, जो सैंपल के लिए खास महत्व रखता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस इलाके से चंद्रमा के बनने की प्रक्रिया और वहां के संसाधनों की अच्छी जानकारी मिल सकती है।

मिशन का मुख्य उद्देश्य

चंद्रयान-4 भारत का पहला सैंपल रिटर्न मिशन होगा। इसका काम चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करना, वहां की मिट्टी और पत्थरों के सैंपल इकट्ठा करना और उन्हें सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर वापस लाना है। अनुमान है कि 2 से 3 किलोग्राम तक सैंपल लाए जा सकते हैं। यह चंद्रयान-3 की सफलता के बाद लिया गया अगला बड़ा कदम है। अगर सब ठीक रहा, तो यह आगे चलकर मानव मिशनों की नींव रखेगा।

मिशन के मुख्य हिस्से

  • मिशन में कई मॉड्यूल होंगे –प्रोपल्सन मॉड्यूल – अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए
  • डिसेंटर मॉड्यूल – चंद्रमा पर उतरने के लिए
  • असेंडर मॉड्यूल – सैंपल लेकर वापस ऊपर जाने के लिए
  • ट्रांसफर मॉड्यूल – सैंपल को दूसरे मॉड्यूल में ट्रांसफर करने के लिए
  • रीएंट्री मॉड्यूल – पृथ्वी पर वापस लौटने और सुरक्षित लैंडिंग के लिए

यह सब इतना जटिल है कि दो अलग-अलग लॉन्च की जरूरत पड़ सकती है। एक लॉन्च में लैंडर-असेंडर स्टैक जाएगा, दूसरे में ट्रांसफर और रीएंट्री मॉड्यूल। चंद्रमा पर पहुंचकर असेंडर सैंपल लेकर ऊपर जाएगा, फिर चंद्रमा की कक्षा में ट्रांसफर मॉड्यूल से जुड़ेगा और पृथ्वी की ओर रवाना होगा। यह मिशन इसरो के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण में से एक है, क्योंकि इसमें लैंडिंग, सैंपल कलेक्शन, लॉन्च, डॉकिंग और पृथ्वी पर री-एंट्री जैसी कई नई तकनीकें आजमानी हैं।

Topics: next step after Chandrayaan-3lunar samples returned to Earthचंद्रयान-4 मिशनChandrayaan-4 SACइसरो सैंपल रिटर्नMM-4 लैंडिंग साइटचंद्रयान-3 के बाद अगला कदमचंद्रमा सैंपल पृथ्वी परचंद्रयान-4 SACChandrayaan-4 missionISRO sample returnMM-4 landing site
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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