आचार्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने बताया आत्मा को जोड़ने वाला कार्यक्रम
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कौथिक महोत्सव: आचार्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने बताया आत्मा को जोड़ने वाला कार्यक्रम

देहरादून में सेवा संकल्प फाउंडेशन के 4 दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी शामिल हुए।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
Feb 7, 2026, 08:57 pm IST
inउत्तराखंड

देहरादून : सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित 4 दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में शनिवार को मुख्य अतिथि के रूप में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने प्रतिभाग किया।

आचार्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने कहा कि सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव न केवल हमारी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में स्नेह, सहयोग और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने का भी एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोगों में आपसी सद्भाव, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जीवन मूल्यों की भावना जागृत होती है, जिससे हम अपने अंदर संतुलन, संयम और आत्मिक शांति की ओर अग्रसर हो सकते हैं। उन्होंने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव को केवल लोक संस्कृति का उत्सव नहीं, बल्कि मन और आत्मा को जोड़ने वाला अनुभव बताया।

आचार्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने यह महोत्सव संस्कृति को आत्मसर करने का माध्यम है। उत्तराखंड संस्कृत की जननी है। हर साधु संत सन्यासी ने उत्तराखंड में तपस्या की है भारत का प्रत्येक व्यक्ति इस राज्य का ऋणी है। हर संस्कृति हर सभ्यता उत्तराखंड से नाता रखती है। उन्होंने कहा कि हमें उत्तरायण महोत्सव को देश के अन्य स्थानों में भी ले जाना चाहिए जिससे जन-जन तक उत्तराखंड की संस्कृति पहुंचे।

सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के माध्यम से हमारी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और लोक-परंपराओं को बढ़वा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा देवभूमि उत्तराखंड  अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जानी जाती है।

श्रीमती गीता धामी ने कहा कि लोकगीत और वाद्य यंत्र हमारी लोक संस्कृति को और भी अधिक समृद्ध बनाते हैं। उन्होंने कहा हमारी मातृशक्ति, किसानो, स्वयं सहायता समूहों आदि को अपने उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित करने के लिए भी एक विशिष्ट मंच प्रदान किया जा रहा है।

श्रीमती गीता धामी ने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश भी प्रसारित किया जा रहा है।इसी क्रम में आज नशे के विरुद्ध जागरूकता पर आधारित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से युवाओं और समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने संस्था के सभी स्वयंसेवकों, कलाकारों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

श्रीमती धामी ने कहा कि सेवा संकल्प फाउंडेशन के माध्यम से राज्य में सामाजिक सरोकार से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। उन्होंने कहा हमारा उद्देश्य है कि हम राज्य के दुर्गम और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों तक पहुंच सकें और स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता आदि विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सहायता कर सकें। उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण, स्थानीय कृषि और पारंपरिक उत्पादों के संवर्धन की दिशा में भी निरंतर काम कर रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष भाजपा एवं राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव हमारी लोक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

कैबिनेट मंत्री  गणेश जोशी ने कहा कि यह महोत्सव न केवल संस्कृति का उत्सव है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने संकल्प सेवा फाउंडेशन के कार्यों को सराहनीय बताते हुए उसकी प्रशंसा की।

लोकगीतों गीतों पर नाचे लोग

उत्तरायणी महोत्सव में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पद्मश्री जागर सम्राट  प्रीतम भरतवाण के गीतों पर लोगों ने जमकर नृत्य किया। लोकगायक फौजी ललित मोहन ने कश्मीरी बॉर्डर प्यारी, सौरभ मैठाणी ने “मै पहाड़ो कु रैबासी तू दिल्ली रोंण वाली”, लोक गायक बी.के सामंत – तू ऐजा ओ पहाड़, थल की बजारा,  राजेंद्र प्रसाद के गीतों पर भी लोगों ने जमकर नृत्य किया। उनके मधुर और मार्मिक गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोग तालियों और ताल पर थिरकते हुए लोक संस्कृति के रंग में रंग गए। इसके साथ ही श्वेता माहरा की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगाए।

चित्रकला, भजन और व्यंजन प्रतियोगिता

उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में सांस्कृतिक और पारंपरिक गतिविधियों की श्रृंखला का आयोजन किया गया। इस दौरान चित्रकला प्रतियोगिता, भजन प्रतियोगिता और व्यंजन प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। प्रतियोगिताओं में लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। चित्रकला प्रतियोगिता में पहला स्थान अंशिक चौहान, दूसरा कविशमा राय, तीसरा स्थान अवनी सारियल ने हासिल किया। वहीं व्यंजन प्रतियोगिता में पहला स्थान अंकिता महर, दूसरा स्थान गुरुविंदर कौर, एवं तीसरा स्थान युवा हिमालय जमुना रावत ने हासिल किया। इसके साथ सुलोचना नेगी, देवकला, भूपाल सिंह नेगी , शैली बंसल, निधि थापा को भी सम्मानित किया गया।

कल ये कार्यक्रम होंगे आयोजित

8 फरवरी रविवार को उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करेंगे। साथ ही गायक जुबिन नौटियाल , इन्द्र आर्या, भगनौली टीम अल्मोड़ा, ज्वालेश्वर सांस्कृतिक कला केन्द्र जौलजीवी, दानपुर घाटी सांस्कृतिक दल, शिरोमणी महाराणा प्रताप, थारू दल, संगीतमय योगा द्वारा अपनी प्रस्तुति दी जाएगी।

आज कार्यक्रम में पद्मश्री जागर सम्राट  प्रीतम भरतवाण, विधायक श्रीमती सविता कपूर, दायित्वधारी राज्य मंत्री  हेमराज बजरंगी,  मधु भट्ट, डॉ. गीता खन्ना, गीताराम गौड़, स्वराज विद्वान,   नेहा जोशी,  विनोद उनियाल,  निर्मला जोशी,  मुन्नी भट्ट, आरुषि निशंक, प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा रुचि भट्ट, ललित जोशी, नेहा शर्मा, बलदेव भट्ट, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

Topics: Acharya Swami Avdheshananda GiriKauthik Festival
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