वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने एक रिपोर्ट में चेताया है कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में नीपाह वायरस फैल गया है। इससे देश के उत्तरी हिस्से में जनवरी में एक महिला की नीपाह वायरस से मौत हो गई। यह खबर ऐसे समय आई है जब कुछ हफ्ते पहले ही भारत के पश्चिम बंगाल में दो नीपाह के मामले सामने आए थे।
बांग्लादेश में मौत का मामला
मरीज एक 40-50 साल की महिला थी, जो राजशाही डिवीजन (उत्तर-पश्चिम बांग्लादेश) में रहती थी। उसे 21 जनवरी को नीपाह वायरस जैसे लक्षण शुरू हुए – पहले बुखार और सिरदर्द, फिर ज्यादा लार आना, भटकाव (डिसओरिएंटेशन) और दौरे पड़ना। एक हफ्ते बाद यानी 28 जनवरी को उसकी मौत हो गई। मौत के एक दिन बाद लैब टेस्ट से नीपाह वायरस की पुष्टि हुई।
महिला का कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं था, लेकिन उसने 5 से 20 जनवरी के बीच कच्चे डेट पाम सैप (ताड़ी) पीने की आदत बताई थी। WHO के मुताबिक, नीपाह वायरस ज्यादातर संक्रमित चमगादड़ों से दूषित चीजों (जैसे फल या ताड़ी) के जरिए फैलता है। इंसानों से इंसानों में फैलना बहुत कम होता है। बांग्लादेश में उसके 35 कॉन्टैक्ट्स की जांच की गई और मॉनिटरिंग की जा रही है। सबके टेस्ट नेगेटिव आए हैं और अब तक कोई नया केस नहीं मिला।
पश्चिम बंगाल से कनेक्शन
यह बांग्लादेश का केस दिसंबर 2025 से पश्चिम बंगाल में मिले दो नीपाह मामलों के कुछ हफ्ते बाद आया है। भारत में कुल सातवीं बार नीपाह के मामले आए हैं और पश्चिम बंगाल में तीसरी बार। इन मामलों के बाद एशिया के कई देशों जैसे मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और पाकिस्तान में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है, जैसे टेम्परेचर चेक आदि।
WHO की राय और बैकग्राउंड
WHO ने कहा कि इंटरनेशनल लेवल पर बीमारी फैलने का रिस्क कम है। इसलिए अभी कोई ट्रैवल या ट्रेड रेस्ट्रिक्शन की सलाह नहीं दी गई। बांग्लादेश में नीपाह के मामले लगभग हर साल आते हैं। 2025 में वहां चार लैब-कन्फर्म्ड मौतें हुई थीं। नीपाह एक जानवरों से इंसानों में आने वाला वायरस है, जो चमगादड़ों से शुरू होता है। यह काफी खतरनाक हो सकता है – 75% तक मौत का रिस्क रहता है। अभी तक नीपाह के लिए कोई लाइसेंस्ड दवा या वैक्सीन नहीं है।

















