आम आदमी के नाम पर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) ने वास्तव में आम लोगों के लिए नई सुविधा शुरू की है, इसके तहत आम आदमी रिश्वत की राशि इजी मंथली इंस्टालमेंट (EMI) में भी दे सकता है। ऐसा मामला बठिंडा में सामने आया है। विजिलेंस ने ‘आप’ की महिला विंग की जिला प्रधान एवं गांव कालझरानी से आप की सरपंच सतवीर कौर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत केस दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला
आरोप है कि सतवीर कौर ने अपने गांव के निवासी जतिंदर सिंह को वन विभाग के चेयरमैन राकेश पुरी का ड्राइवर की नौकरी दिलाने के बदले उसकी तनख्वाह से हर माह 8500 रुपए मांगे थे। जतिंदर ने 19 दिसंबर, 2023 में सबूतों समेत विजिलेंस बठिंडा को शिकायत दी, पर विजिलेंस ने सियासी दबाव के चलते कार्रवाई नहीं की।
इस पर पीड़ित ने 2025 में हाईकोर्ट में सबूतों समेत याचिका लगा दी। हाईकोर्ट ने मामले में विजिलेंस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए, जिसके बाद अब जाकर विजिलेंस ने सरपंच पर एफआईआर दर्ज की है। वहीं, विजिलेंस ने राकेश पुरी पर कार्रवाई के मामले में एफआईआर में लिखा है कि अगर उसका केस में रोल सामने आया तो उसको भी नामजद किया जाएगा। हैरानी की बात यह है कि मामले में विजिलेंस ने 25 जनवरी को ही एफआईआर दर्ज कर ली थी, पर इसका खुलासा नहीं किया और न ही उसको अभी तक अरेस्ट किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए सरपंच सतवीर ने बठिंडा अदालत में 5 फरवरी को याचिका लगा दी है, जिस पर 9 फरवरी को सुनवाई है।
सरपंच अभी तक फरार, बचाव के लिए बठिंडा कोर्ट में अर्जी लगाई पीड़ित ने विजिलेंस को 11 ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग सौंपी थी। इन रिकॉर्डिंग्स की ट्रांसक्रिप्ट शिकायतकर्ता की मौजूदगी में तैयार की गई। जांच में सामने आया कि बातचीत के दौरान सतवीर कौर ने 8500 रुपये मासिक लेने की बात स्वीकार की और यह भी माना कि पहले 10 हजार लिए जा चुके हैं। इन रिकार्डिंगों में चेयरमैन पुरी से हुई बातचीत भी शामिल है। विजिलेंस इंस्पेक्टर राजनदीप कौर ने कहा कि आरोपी सतवीर को पकड़ने के लिए रेड जारी है।
पीड़ित का बयान
पीड़ित ने बताया कि वह भी 2013-2014 से आप का वालंटियर है। उस समय सतवीर कौर भी वालंटियर थी। चेयरमैन राकेश पुरी भी पार्टी में थे, इनके जरिए 25 जुलाई 2023 को पेस्को के माध्यम से जंगलात विभाग में बतौर ड्राइवर नियुक्ति हुई। 22500 रुपये सैलरी आती थी। एक माह बाद सरपंच और चेयरमैन ने दफ्तर बुलाया। दोनों ने प्रतिमाह 10 हजार की मांग रखी। मना करने पर दोनों ने 8500 रुपए हर माह वेतन से देने की मांग की। सोशल मीडिया पर इंसाफ की मांग करता तो नोटिस भेजा जाता। 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद विजिलेंस को एफआईआर दर्ज करना पड़ी है।















