
डोनाल्ड ट्रंप
वेनेजुएला जैसे संप्रभु राष्ट्र को तबाह करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर उसके तेल पर है। उन्होंने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है कि अमेरिका और वेनेजुएला मिलकर दुनिया के करीब 68 प्रतिशत तेल भंडार रखते हैं। यह बात उन्होंने वॉशिंगटन में 74वें नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट कार्यक्रम के दौरान कही। ट्रंप का कहना था कि दोनों देशों के पास मिलाकर दुनिया का ज्यादातर तेल है, और अब इसका फायदा उठाया जाएगा।
ट्रंप ने अपने भाषण में वेनेजुएला की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के पास दुनिया में सबसे ज्यादा तेल भंडार हैं, शायद अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर। देश की आर्थिक हालत बहुत खराब रही है, लेकिन वहां तेल की कोई कमी नहीं है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस साल जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। अब वहां के तेल का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका और वेनेजुएला मिलकर वैश्विक तेल भंडार पर बड़ा कब्जा रखते हैं।
ट्रंप ने भारत का नाम भी लिया। उनका कहना था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका तथा शायद वेनेजुएला से कच्चा तेल लेना शुरू करने पर सहमति जता दी है। लेकिन भारत की तरफ से इस पर स्पष्ट जवाब आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए ऊर्जा स्रोतों को विविधता देना यानी डाइवर्सिफाई करना जरूरी है। भारत अपने फैसले बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय माहौल को देखकर लेता है।
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वेनेजुएला के साथ भारत का पुराना रिश्ता रहा है। 2019-20 तक भारत वहां से कच्चा तेल आयात करता था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह रोकना पड़ा। फिर 2023-24 में आयात दोबारा शुरू हुआ, मगर प्रतिबंध फिर लगने से इसे बंद करना पड़ा। प्रवक्ता ने कहा कि वेनेजुएला एनर्जी क्षेत्र में भारत का लंबे समय से पार्टनर रहा है, चाहे ट्रेड हो या निवेश। भारत किसी भी देश से कच्चे तेल की आपूर्ति के व्यवसायिक फायदे देखकर तैयार रहता है, बशर्ते ऊर्जा सुरक्षा का ध्यान रहे।
ट्रंप के इस बयान से तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर चर्चा तेज हो गई है। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार माने जाते हैं, लेकिन उत्पादन कम रहा है। अमेरिका खुद दुनिया का बड़ा तेल उत्पादक है। ट्रंप के दावे में 68 प्रतिशत का आंकड़ा काफी बड़ा है, जो दोनों देशों के संयुक्त भंडार पर आधारित लगता है।