तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही डीएमके नेताओं ने एक बार फिर से हिन्दी विरोधी बयानबाजी शुरू कर दी है। डीएमके नेताओं के बयानों के कारण हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषा का मुद्दा गरमा गया है। इस बार विवाद की शुरुआत तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए बयान से हुई। डीएमके के इस नेता ने उत्तर भारत के लोगों को लेकर ऐसा कुछ कहा कि बिहार के नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा। पूरा मामला 5 फरवरी 2026 को सामने आया, जब मंत्री के शब्दों ने उत्तर-दक्षिण के बीच पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया।
मंत्री पन्नीरसेल्वम ने क्या कहा?
एक कार्यक्रम में बोलते हुए एमआरके पन्नीरसेल्वम ने कहा कि उत्तर भारत के लोग सिर्फ हिंदी जानते हैं, इसलिए उन्हें छोटे-मोटे काम ही मिलते हैं। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण भारत के लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी भी अच्छे से बोलते हैं, जिसकी वजह से वे विदेशों में बड़े पदों पर पहुंच जाते हैं और अच्छी कमाई करते हैं। विवाद तब बढ़ा जब उन्होंने उत्तर भारतीयों को तमिलनाडु में पानीपुरी बेचने, टेबल साफ करने या मजदूरी करने आए लोग बताया। उनका मतलब था कि भाषा की कमी के कारण उत्तर भारत के लोग बड़े अवसर नहीं पा पाते।यह बयान चेंगलपट्टू जैसे इलाके में दिया गया, जहां उत्तर भारतीय मजदूरों की संख्या अच्छी-खासी है।
बिहार में भड़का गुस्सा
बयान सुनते ही बिहार की सियासत में भूचाल आ गया। एनडीए के कई नेताओं ने एक साथ इसकी निंदा की और इसे देश की एकता के खिलाफ बताया। बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि ऐसी विभाजनकारी बातें किसी नेता को शोभा नहीं देतीं। देश में एकता का माहौल होना चाहिए और ऐसे बयानों की सख्त निंदा होनी चाहिए।
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पन्नीरसेल्वम का दिमाग प्रदूषित हो गया है। या तो उन्हें गंगा का पानी का इंजेक्शन लगाना पड़ेगा या फल्गु डैम का पानी, जो बिहार पहुंचाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार के लोग बोझ नहीं हैं, बल्कि तमिलनाडु में रहने वाले तमिल लोग यहां बिना किसी परेशानी के रहते हैं। चुनावी साल में काम की उपलब्धियां न बता पाने की वजह से ऐसे अनाप-शनाप बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र से मांग की कि ऐसे लोगों का इलाज अच्छे अस्पताल में हो, जहां दिमाग की हर नस की जांच होती है।
संजय कुमार झा ने क्या कहा?
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने उत्तर भारतीयों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जहां भी उत्तर भारतीय गए, उन्होंने वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। कांग्रेस को इस पर जवाब देना चाहिए और डीएमके को अपना रुख साफ करना चाहिए।
चिराग पासवान की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इसे बांटने वाली राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि कुछ नेता सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। उनकी राजनीति ‘बांटो और राज करो’ पर चलती है—कभी जाति, कभी धर्म, कभी भाषा, कभी क्षेत्र के नाम पर। एनडीए गठबंधन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चल रहा है। योजनाएं और नीतियां सिर्फ देश की आबादी को देखकर बनती हैं। अपनी बात रखें, लेकिन मर्यादा में रहकर। कड़े प्रहार भी मर्यादित भाषा में हो सकते हैं।












