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ब्रिटेन में बढ़ रही चर्च में झाड़फूँक कराने वालों की संख्या?

खुद को आधुनिक कहने वाले ब्रिटेन में चर्च ऑफ इंग्लैंड में एक्सॉर्सिज़्म और झाड़फूँक की बढ़ती घटनाएं, लॉकडाउन के बाद चौंकाने वाला खुलासा।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Feb 5, 2026, 09:00 pm IST
inविश्व

अपने आप को विकसित कहने वाले ब्रिटेन में चर्च जाने वालों की ओर से एक और चौंकाने वाली खबर आ रही है। मीडिया के अनुसार चर्च ऑफ लंदन के वरिष्ठ अधिकारी ने यह दावा किया है कि बहुत भारी संख्या में लोग चर्च ऑफ इंग्लैंड में झाड़फूँक कराने आ रहे हैं।जीबी न्यूज के अनुसार डिलिव्रन्स मिनिस्ट्री के लिए राष्ट्रीय अधिकारी डॉ एनने रिचर्ड्स और रीडिंग एंड मोनमाउथ के पूर्व बिशप राइट रेव डोमिनिक वॉकर ने यह खुलासा किया है कि चर्च में ज्यादा से ज्यादा लोग “ईवल से मुक्ति” के लिए आ रहे हैं।

हालांकि चर्च के अधिकारियों का कहना है कि ईवल से मुक्ति की चाह में जो लोग आते हैं, वे शांत होते हैं, वे हॉलिवुड की फिल्मों की तरफ हिंसक नहीं होते हैं और वे बस अपने दिमाग की शांति के लिए आते हैं।

द क्रिश्चियन न्यूज के अनुसार चर्च की डिलीवरेंस मिनिस्ट्री की नेशनल ऑफिसर डॉ. ऐनी रिचर्ड्स ने कहा- “उनके पास आने वाली पूछताछ की संख्या बढ़ रही है। यह कहना सही होगा कि मदद के लिए अनुरोध बढ़ रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के अंदर से आत्मा को निकाला जा रहा है। यह कई तरह की चीज़ों से जुड़ा है”

अर्थात ऐसा नहीं है कि शैतान या आत्मा को बाहर निकालने के लिए लोग चर्च में झाड़फूँक के लिए जा रहे हैं।

लॉकडाउन के बाद बढ़ी संख्या

रिचर्ड के अनुसार जब कोविड 19 के दौरान लॉक डाउन के चलते अपने अपने घरों में कैद थे तो उन्हें अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देती थीं। हालांकि अधिकांश मामलों में ये आवाजें पानी या किसी और चीज की निकलीं। परंतु इन अजीबोगरीब आवाजों के कारण एक्सॉर्सिज़म की घटनाओं में वृद्धि हुई।

यह बात इसलिए चर्चा में आया क्योंकि हाल ही में टेलीग्राफ ने एक हास्पिस की घटना को साझा किया था, जो पहले एक बच्चों के अस्पताल की जगह पर था और वहाँ पर कर्मियों को एक लाल ड्रेस में छोटी बच्ची दिखती थी। उसके बाद उस बिल्डिंग को ब्लेसिंग दिलवाई गई थी।

जिन्नों को भगाने के लिए भी करते हैं मौलाना झाड़फूँक?

वर्ष 2012 में बीबीसी ने एक बहुत ही रोचक रिपोर्ट का प्रकाशन किया था। इसका शीर्षक था “Possession, Jinn and Britain’s backstreet exorcists” अर्थात “जिन्न का शरीर पर आना, जिन्न और ब्रिटेन के गली मोहल्ले के झाड़फूँक करने वाले!”

इसमें जिन्न भगाने वाले मोहम्मद का उल्लेख था। बीबीसी के अनुसार उसके पास वेटिंग लिस्ट होती थी और वह उस समय एक घंटे के सेशन का £60 लेता था। उसके कई क्लाइंट्स थे। एक क्लाइंट था मुदस्सर खान। वह उस समय 41 वर्ष का था और उसके अनुसार सालों से जिन्न उसके शरीर पर कब्जा किये हुए है।

उस व्यक्ति का कहना था कि वह कुरान से जिन्नों को भगाता है। वहीं एक और मामले की बीबीसी बात करता है, जिसमें जिन्न होने का दावा करके एक महिला की हत्या कर दी गई थी। नईला नामक महिला की हत्या का मुकदमा बर्मिंघम क्राउन कोर्ट में चला था, जिसमें कोर्ट को यह बताया गया था कि मिसेज मुमताज़ के ससुराल वाले, ज़िया उल-हक और सलमा असलम, जिन्हें उनके पति मोहम्मद मुमताज़ और देवर हम्माद हसन के साथ उनकी हत्या का दोषी ठहराया गया था, उन्हें लगता था कि मिसेज मुमताज पर बुरी आत्माओं का साया है।

ट्रायल में यह सबूत सामने आया कि परिवार के सदस्यों ने जिन्न को भगाने की कोशिश में उनकी हत्या कर दी।

ऐसा भी दावा किया जाता रहा है कि जिन्न विचार का इस्तेमाल समुदाय को सही करने के लिए किया जाता है। जैसे कि अगर कोई सही व्यवहार नहीं कर रहा है या फिर किसी का विचार बहुत चरम पर है तो उसे मानसिक समस्या न मानकर जिन्न की समस्या कह दिया जाता था।

बीबीसी के अनुसार यासमीन इशाक नामक महिला ने, जो रॉथरहम में टीचर थी, भी यह कहा कि अगर कोई बुरी स्थिति में रह रहा है और या उसका उत्पीड़न हो रहा है, और वह आवाज उठाता है तो यह कह दिया जाएगा कि उस पर जिन्न का साया है।

गार्डीअन ने वर्ष 2017 में चर्च में एक्सॉर्सिज़म के बढ़ने को लेकर लिखी थी रिपोर्ट

गार्डीअन ने वर्ष 2017 में ही यह लिखकर चेताया था कि यूके में एक्सॉर्सिज़म एक बूमिंग इंडस्ट्री होने जा रही है और खासतौर पर आप्रवासी समुदायों और पेंटेकॉस्टल चर्चेज से। और इसमें यह भी लिखा था कि जिन लोगों पर झाड़फूँक की जा रही है, उनमें से अधिकतर को मानसिक या मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता है। इस रिपोर्ट ने इस विषय में विश्लेषण की मांग की थी कि यूके में जो झाड़फूँक हो रही है उसे कैसे प्रयोग किया जा रहा है और कैसे इसके नकारात्मक परिणाम आ रहे हैं।

गली मुहल्ले में बढ़ रहा है जादूटोना और झाड़फूँक

जब इस विषय में और खोजा जाता है तो यह और पता चलता है कि ब्रिटेन में अब गली मोहल्लों अर्थात समुदायों के बीच अपने मत के अनुसार झाड़फूँक का चलन बढ़ रहा है, जो इसलिए घातक है क्योंकि इसमें हिंसा की घटनाएं भी शामिल रहती हैं।

अब हाल की रिपोर्ट और भी अधिक इशारा करती है कि कैसे चर्च ऑफ लंदन में एक्सॉर्सिज़म की घटनाएं बढ़ रही हैं, मगर भारत में सूर्य देव को जल चढ़ाने पर घंटों बहस करने वाला औपनिवेशिक मीडिया कभी ब्रिटेन में इस प्रकार के झाड़फूँक और अंधविश्वास पर बहस क्यों नहीं करता?

Topics: Religion DebateUK exorcism newsChurch of England jhadphoonksuperstition in BritainUK church exorcism reportBritish media hypocrisyUK Church NewsExorcism UKChurch of EnglandSuperstition in UKBritish Media
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