राष्ट्रीय विचारधारा को समर्पित साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य अपनी यात्रा के 79वें वर्ष मना रहा है। इस अवसर पर 30 जनवरी को नई दिल्ली के ए. पी. शिंदे सभागार (NASC परिसर, पूसा) में विशेष समागम “बात भारत की” का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम के विशेष सत्र में RSS के अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य श्री मुकुल कानिटकर ने भी भाग लिया, जहां पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर ने उनसे खास बातचीत की। इस दौरान कानिटकर जी ने भारत, सनातन, राष्ट्रवाद और समरसता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।
श्री मुकुल कानिटकर ने कहा कि जो चिरंतन है उसे थामे रखना और परिवर्तन को स्वीकार करना संघ का स्वभाव है। भारत के मूल में समरसता और सांस्कृतिक एकता है, जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है, भारत में रहता है और चाहे किसी भी ईश्वर की पूजा करता हो, वह हिंदू है, क्योंकि हिंदू हमारी राष्ट्रीयता है। पूरा वीडियो देखें
















