बरसाना की लठमार होली देखनी है? वृंदावन कब पहुंचें, जानिए पूरी ट्रैवल गाइड
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बरसाना की लठमार होली देखनी है? वृंदावन कब पहुंचें, जानिए पूरी ट्रैवल गाइड

बरसाना वही पवित्र जगह है, जहां राधा रानी का जन्म हुआ था। मान्यता है कि इसी स्थान पर श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ होली खेलने आते थे और राधा रानी व उनकी सखियां उन्हें प्यार भरे अंदाज में लाठियों से मारती थीं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Feb 5, 2026, 03:43 pm IST
inयात्रा
Barsana Lathmar Holi

Barsana Lathmar Holi

भारत में होली का नाम आते ही रंग, गुलाल और खुशियों की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है। देश के ज़्यादातर हिस्सों में यह त्योहार एक या दो दिन में ही खत्म हो जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में होली सिर्फ एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि करीब 40 दिनों तक चलने वाला उत्सव है। भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ी ब्रज की होली दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है। इसी ब्रज क्षेत्र में मनाई जाने वाली बरसाना की लठमार होली सबसे खास और अनोखी मानी जाती है, जिसे देखने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

बरसाना लठमार होली- बरसाना वही पवित्र जगह है, जहां राधा रानी का जन्म हुआ था। मान्यता है कि इसी स्थान पर श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ होली खेलने आते थे और राधा रानी व उनकी सखियां उन्हें प्यार भरे अंदाज में लाठियों से मारती थीं। इसी परंपरा को आज भी जीवित रखते हुए बरसाना में लठमार होली खेली जाती है। इस होली में महिलाएं पुरुषों पर प्रतीकात्मक रूप से लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल लेकर खुद को बचाते हैं। यह दृश्य देखने में जितना अनोखा होता है, उतना ही भावनाओं और आस्था से भरा होता है।

रंगों में डूबेगा पूरा ब्रज- ब्रज परंपरा के अनुसार साल 2026 में बरसाना की लठमार होली 25 और 26 फरवरी को मनाई जाएगी। 25 फरवरी को बरसाना में लड्डू होली खेली जाएगी, जिसमें राधा रानी के मंदिर से भक्तों पर लड्डू बरसाए जाते हैं। वहीं 26 फरवरी को मुख्य लठमार होली का आयोजन होगा, जिसे देखने के लिए सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। इसके बाद नंदगांव में भी लठमार होली खेली जाती है, जहां श्रीकृष्ण की नगरी में अलग ही रंग देखने को मिलता है। अगर आप इस अनोखी होली का पूरा अनुभव लेना चाहते हैं, तो सिर्फ एक दिन की यात्रा से काम नहीं चलेगा। वृंदावन लठमार होली का सही अनुभव लेने के लिए रंगवाली होली से कम से कम 4 से 5 दिन पहले वृंदावन पहुंचना सबसे बेहतर माना जाता है। इससे आपको बरसाना, नंदगांव, मथुरा और वृंदावन में होने वाले अलग-अलग होली कार्यक्रमों में शामिल होने का भरपूर समय मिल जाता है। त्योहार नजदीक आते ही भीड़ काफी बढ़ जाती है, इसलिए पहले से पहुंचना ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक रहता है।

यात्रा और पहुंचने का सही समय- अब बात करते हैं यात्रा की। वृंदावन या मथुरा से बरसाना की दूरी लगभग 45 से 50 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। होली के दिन ट्रैफिक और भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए सुबह बहुत जल्दी निकलने की सलाह दी जाती है। वहीं दिल्ली से बरसाना की दूरी करीब 150 किलोमीटर है, जहां से आप अपनी गाड़ी या टैक्सी के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। लठमार होली के दिन बरसाना में भारी भीड़ रहती है, इसलिए सुबह 5 से 6 बजे के बीच पहुंचना सबसे सही माना जाता है। देर से पहुंचने पर आपको अंदर जाने में परेशानी हो सकती है और अच्छे नज़ारे देखने का मौका भी छूट सकता है।

ठहरने के टिप्स- इस दौरान कुछ जरूरी सावधानियां भी ध्यान में रखनी चाहिए। लठमार होली के समय हल्के और पूरे बाजू के कपड़े पहनें, ताकि रंग और भीड़ से खुद को सुरक्षित रख सकें। मोबाइल, पर्स और जरूरी सामान को सुरक्षित जगह पर रखें। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए समूह में यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। ठहरने की बात करें तो बरसाना में होटल और धर्मशालाएं बहुत सीमित हैं, इसलिए ज्यादातर लोग वृंदावन या मथुरा में ही ठहरते हैं। यहां से सुबह-सुबह बरसाना जाकर शाम तक वापस लौटना सबसे सुविधाजनक रहता है। होली के समय होटल जल्दी भर जाते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग कराना बहुत जरूरी होता है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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