भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के 50 से अधिक सक्रिय सैटेलाइट्स पर सौर गतिविधियों के कारण खतरा मंडरा रहा है, जिसकी इसरो लगातार निगरानी कर रहा है। बताया जा रहा है कि तीव्र सौर लपटों के कारण रेडियो ब्लैकआउट, नेविगेशन (जीपीएस) और कम्युनिकेशन सेवाओं में रुकावट आने की संभावना है। अंतरिक्ष में भारतीय सैटेलाइट्स की सुरक्षा में जुटे इसरो के वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। सूर्य की सतह पर बढ़ती हलचल और सौर गतिविधियों में आए अचानक उछाल ने अंतरिक्ष में मौजूद मानव निर्मित मशीनों के लिए चिंता पैदा कर दी है। इसरो अपने उपग्रहों की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट पर है।
सौर गतिविधि और सैटेलाइट्स पर असर
सूर्य से निकलने वाली तीव्र ऊर्जा और आवेशित कण, जिन्हें सौर तूफान या ‘कोरोनल मास इजेक्शन’ (सीएमई) कहा जाता है, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। जब ये कण अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के संपर्क में आते हैं, तो वे उनके नाजुक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पेलोड्स को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी अनिल कुमार के अनुसार, सौर गतिविधियों के कारण रेडियो ब्लैकआउट होने की आशंका है। इसका सीधा असर लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर पड़ सकता है, क्योंकि मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, टीवी सिग्नल और हवाई जहाजों के संचालन में उपयोग होने वाला नेविगेशन सिस्टम पूरी तरह इन सैटेलाइट्स पर निर्भर करता है।
इसरो के ‘स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस’ (एसएसए) कंट्रोल सेंटर से इन सभी 50+ सैटेलाइट्स पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सौर तूफान के दौरान कम्युनिकेशन में किसी भी तरह की बाधा आती है, तो उसे तुरंत ठीक करने के लिए बैकअप प्लान तैयार रखे गए हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि सौर चक्र (सोलर साइकिल) अब अपने चरम पर पहुंच रहा है, जिसे ‘सोलर मैक्सिमम’ कहा जाता है। इस दौरान सूर्य से अत्यधिक मात्रा में विकिरण निकलता है। इसरो के सैटेलाइट्स जैसे कि जीसैट,इनसैट और आईआरएनएसएस जो देश की सुरक्षा और संचार के लिए रीढ़ की हड्डी हैं, उन्हें विशेष सुरक्षा मोड में रखा जा सकता है ताकि उनके पेलोड्स खराब न हों।
क्या होता है रेडियो ब्लैकआउट ?
जब सौर लपटें पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल से टकराती हैं, तो वे रेडियो तरंगों के रास्ते में बड़ी बाधा उत्पन्न करती हैं। इसे ही रेडियो ब्लैकआउट कहा जाता है। इससे समुद्री जहाजों, विमानों और आपातकालीन सेवाओं के बीच होने वाला संचार टूट सकता है। इसरो इस कोशिश में जुटा है कि सौर तूफानों के बावजूद भारत की संचार व्यवस्था और सैटेलाइट्स ठीक रहें।











