समझ नहीं आता है कि सनातन धर्म को मामने वालों से दुनिया को क्या दिक्कत है। किसी न किसी रूप में हिन्दू धर्म का पालन करने पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। ताजा मामला लंदन की विकार ग्रीन प्राइमरी स्कूल का है, जहां एक 8 साल के हिंदू बच्चे को तिलक-चंदलो लगाने की वजह से स्कूल में दिक्कत हुई। जनवरी 2026 में बच्चे के माता-पिता ने उसे इस स्कूल से निकालकर कहीं और डाल दिया।
क्या हुआ था?
बच्चा रोज अपनी माथे पर तिलक-चंदलो लगाकर स्कूल जाता था। यह हिंदू धर्म में एक सामान्य और पवित्र प्रथा है, जो कई परिवारों में रोज की रस्म होती है। स्कूल ने इसे मंजूर नहीं किया और बच्चे को क्लास में ऐसे नहीं आने दिया। स्कूल की तरफ से कहा गया कि उनकी पॉलिसी के मुताबिक कोई भी दिखने वाली स्किन मार्किंग – चाहे धार्मिक हो – नहीं लगानी चाहिए।
स्कूल ने परिवार की धार्मिक भावनाओं को मानते हुए एक समझौता सुझाया था। उन्होंने कहा कि तिलक को शरीर के किसी कम दिखने वाले हिस्से पर लगाया जा सकता है, ताकि पॉलिसी भी बनी रहे और बच्चे की आस्था का भी सम्मान हो। लेकिन परिवार इस बात से राजी नहीं हुआ।
स्कूल की तरफ से क्या कहा गया?
स्कूल ने अपनी यूनिफॉर्म और डेकोरम की पॉलिसी का हवाला दिया। उनका कहना है कि यह नियम सभी बच्चों पर बराबर लागू होता है, ताकि क्लास में कोई भेदभाव न दिखे। उन्होंने यह भी कहा कि वे परिवार की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हैं, इसलिए पूरी तरह रोकने की बजाय छोटा-सा बदलाव सुझाया था।
पहले भी चार हिन्दू बच्चों के साथ भी ऐसा हुआ था
ब्रिटिश बिटिश हिन्दू और भारत समुदायों के लिए काम करने वाले INSIGHT UK नाम के संगठन के मुताबिक स्कूल ने बच्चे से उसकी आस्था के बारे में सवाल किए, ब्रेक टाइम में उसकी निगरानी की, और कुछ जिम्मेदारियां भी छीन लीं। इससे बच्चा परेशान हो गया, दोस्तों से अलग-थलग महसूस करने लगा। माता-पिता ने जब तिलक की धार्मिक अहमियत समझाने की कोशिश की, तो उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
संगठन का कहना है कि ऐसा ही व्यवहार कम से कम चार हिंदू बच्चों के साथ हो चुका है, जिस कारण से उन्हें स्कूल छोड़ने को मजबूर कर दिया गया। संगठन का कहना है कि तिलक-चंदलो कोई फैशन या सजावट नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की अहम धार्मिक प्रथा है। वे इसे UK के समानता का अधिकार अधिनियम 2010 के तहत धार्मिक भेदभाव मानते हैं।











