ममता बनर्जी की मजबूरी: 2026 बंगाल चुनाव में दो सीटों से लड़ना क्यों जरूरी?
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ममता बनर्जी की मजबूरी: 2026 बंगाल चुनाव में दो सीटों से लड़ना क्यों जरूरी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी दो सीटों से चुनाव लड़ सकती हैं। नंदीग्राम हार का झटका और भवानीपुर में घटता वोट शेयर उनकी मजबूरी बता रहा है। भाजपा का ग्राफ बढ़ता जा रहा है – पढ़िए पूरा विश्लेषण।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Feb 3, 2026, 09:47 am IST
inभारत, विश्लेषण
ममता बनर्जी

ममता बनर्जी

आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधानसभा एक नहीं बल्कि दो विधानसभा की सीटों से चुनाव लड़ सकती हैं। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी इसे पार्टी को मजबूत करने का कदम बताने का प्रयास करेगी, मगर दो सीटों से चुनाव लड़ना ममता बनर्जी की मजबूरी है। 2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम विधानसभा सीट हारने के बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और फिर भवानीपुर विधानसभा सीट से विधायक बनी थीं। ममता बनर्जी इस तथ्य से अवगत हैं कि अगर वह 2021 में नंदीग्राम की तरह इस बार भी अपना चुनाव हार जाती हैं, तो इससे पार्टी के अंदर उनके लिए मुश्किल हालात बन सकते हैं। ममता बनर्जी अभी तक नंदीग्राम के राजनीतिक झटके से उबर नहीं पाई हैं और इस बार वह अपनी भवानीपुर विधानसभा सीट के अलावा किसी दूसरी सीट से चुनाव लड़ सकती हैं।

राजनीतिक पतन का कारण बन सकता है ये 

दो सीटों से विधानसभा का चुनाव लड़ना कई नेताओं के लिए राजनीतिक पतन का कारण बना है। 2010 के बिहार विधानसभा के चुनाव में बिहार की दो बार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सोनपुर और राघोपुर विधानसभा की सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों से चुनाव हार गईं। लालू यादव 2009 के लोकसभा का चुनाव दो सीटों पाटलिपुत्र और सारण दो लोकसभा की सीटों से लड़ा और पाटलिपुत्र से चुनाव हार गए। इन परिणामों के बाद लालू यादव परिवार और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का राजनीतिक पतन हो गया और लालू यादव को फिर नीतीश कुमार के साथ गठबंधन करना पड़ा।

पश्चिम बंगाल में बढ़ता भाजपा का ग्राफ

भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ पश्चिम बंगाल दिनोदिन बढ़ता जा रहा है, जिससे कि ममता बनर्जी काफी चिंतित हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीट जीतने में कामयाब हासिल की थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 91 विधानसभा सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रही थी।

लोकसभा चुनाव के परिणाम ने ममता बनर्जी को दो सीटों पर चुनाव लड़ना उनकी ज़रूरत बना दिया है। लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की विधानसभा की सीट भवानीपुर विधानसभा में भाजपा से महज 8297 वोटों से आगे रहने में कामयाब हुई थी। ऐसा परिणाम तब हुआ था, जबकि लोकसभा चुनाव में माकपा को इस विधानसभा सीट पर 14006 वोट मिले थे।

भवानीपुर विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस का मत प्रतिशत 2024 के लोकसभा चुनाव में 2021 के उपचुनाव के अपेक्षा घटकर आधे से भी कम हो गया है। अतएव ममता बनर्जी इस सीट पर चुनाव लड़ने को लेकर काफी पेशोपेश में हैं। मगर उम्मीद है कि ममता बनर्जी इस सीट को छोड़कर किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने के बदले एक अन्य सीट से भी चुनाव लड़ेंगी। भवानीपुर विधानसभा सीट पर 2024 के लोकसभा के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस पार्टी का मत प्रतिशत घटकर महज 30.39  प्रतिशत पर सिमट गया है। अतएव ममता बनर्जी के पास इसके अलावा कोई अन्य विकल्प भी नहीं है। भाजपा इस बार भवानीपुर विधानसभा सीट को भी 2021 की तरह नंदीग्राम सीट बनाने का पूरा प्रयास करेगी।

2021 विधानसभा उपचुनाव 


2024 लोकसभा चुनाव

आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए चुनौती देंगे इसकी पूरी संभावना है। मगर ममता बनर्जी किसी भी कीमत पर नंदीग्राम से चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगी। 2024 के लोकसभा चुनावों में नंदीग्राम विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन भी ममता बनर्जी को अंदर से कमजोर कर रहा है। नंदीग्राम विधानसभा सीट तमलुक लोकसभा क्षेत्र में आती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं थी। जबकि, बाकी दो सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज़ की थी। 2024 लोकसभा चुनाव में तमलुक लोकसभा क्षेत्र के सभी सात विधानसभा सीटों में भाजपा आगे रही थी। नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से 10,000 से ज्यादा वोटों से आगे थी। अतएव ममता बनर्जी अब किसी भी स्थिति में नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं ले सकती हैं। विदित हो कि  ममता बनर्जी 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम विधानसभा सीट से 1956 वोटों से हारी थी।

ममता बनर्जी का आगामी विधानसभा चुनाव में संभावित दो सीटों से चुनाव लड़ना भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता हैं। भाजपा इसे ममता बनर्जी की पलायनवादी राजनीति के तौर पर प्रदर्शित करेगी।

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अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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