पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में असहिष्णुता देखने को मिल रही है। घटना पूर्व मेदिनीपुर जिले की है, जहां आरएसएस के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम के दौरान साधु-संतों पर हमला कर दिया गया। साधु संतों के जय श्री राम के नारे लगाने के चलते उन पर ये हमला किया गया। मारपीट का आरोप टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर लगा है। इस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया है।
घटना कहां और कब हुई
यह मामला पूर्व मेदिनीपुर जिले के भगवानपुर ब्लॉक के गुडग़्राम इलाके का है। आरएसएस ने अपने 100 साल पूरे होने के मौके पर वहां कार्यक्रम रखा था। इसी दौरान स्वामी सूर्यानंद समेत कुछ साधु-संत मौजूद थे। कार्यक्रम चल रहा था और लोग ‘जय श्रीराम’ के नारे लगा रहे थे। तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और साधुओं से पूछा कि ये नारे क्यों लगा रहे हो। साधुओं ने जवाब दिया कि श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। इसके बाद बात बढ़ गई। आरोप है कि उन लोगों ने साधुओं को गालियां दीं, पीटा, उनके कपड़े तक फाड़ दिए। स्वामी सूर्यानंद को काफी चोटें आईं। उन्हें चंडीपुर के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
क्या-क्या आरोप लगे
आरएसएस और भाजपा का कहना है कि ये हमला तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के समर्थकों ने किया। उनका आरोप है कि साधु-संतों को सिर्फ ‘जय श्रीराम’ बोलने की वजह से जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट की गई। भाजपा नेता शंकुदेव पांडा सहित कई लोगों ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया और कहा कि बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ, टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ये भाजपा की आपसी कलह का नतीजा हो सकता है।
जिहादियों ने जानवरों की तरह हमला किया
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया एक्स प्लेटफॉर्म के जरिए कहा कि भगवानपुर में शांतिपूर्ण हिन्दू सम्मेलन के दौरान हमले में घायल स्वामी सूर्यानंद महाराज से अस्पताल में उनसे मुलाकात की। उनका एकमात्र “अपराध” पवित्र मंत्र ‘जय श्री राम’ का जाप करना था। ये वो नारा है जो हर स्वाभिमानी हिंदू की आत्मा में गूंजता है।
स्वामी जी ने मुझे व्यक्तिगत रूप से उस भयावह घटना के बारे में बताया; TMC समर्थित गुंडों और “जिहादियों” ने उन पर जंगली जानवरों की तरह हमला किया। उन्होंने ठंडे खून से उनकी हत्या करने की कोशिश में उनके गले में फंदा डालकर उनका गला घोंटने की कोशिश की। उनके सीने पर मुक्के, लात और घूंसे बरसाए गए। यह अराजकता नहीं है, यह हिंदू गौरव का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ राज्य प्रायोजित आतंकवाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासन में, पश्चिम बंगाल हिंदू विरोधी ताकतों के लिए एक शिकारगाह बन गया है। दिन-ब-दिन, सनातनियों को निशाना बनाया जा रहा है, मंदिरों में तोड़फोड़ की जा रही है, संतों पर हमला किया जा रहा है, और हिंदुओं को अपमानित किया जा रहा है, यह सब इसलिए क्योंकि राज्य सरकार तुष्टीकरण और वोट-बैंक की राजनीति के नाम पर हमलावरों की रक्षा करती है।
I visited the hospital to meet and stand in solidarity with the gravely injured Swami Suryananda Maharaj, who was brutally assaulted during a peaceful Hindu Sammelan in Bhagabanpur in Purba Medinipur district.
His only "crime"? Raising the sacred chant of **Jai Shri Ram**; a… pic.twitter.com/eD3y2KJlnJ— Suvendu Adhikari (@SuvenduWB) February 1, 2026
पुलिस ने क्या किया
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जिले के पुलिस अधीक्षक मिथुन दे ने बताया कि मुख्य आरोपी जगन्नाथ माइती और उसके कुछ साथियों पर हमले का आरोप है। पुलिस ने जगन्नाथ माइती को गिरफ्तार कर लिया है। अभी और जांच चल रही है कि बाकी लोग कौन थे और पूरा मामला क्या है।यह घटना बंगाल में धार्मिक और राजनीतिक माहौल को लेकर पहले से चल रही बहस में एक और कड़ी जोड़ती है। साधु-संतों पर हमले की खबर से लोग काफी नाराज हैं और जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।

















