केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट-2026-27 पेश किया, जिसमें उन्होंने कई बड़े सुधारों के ऐलान किए। इसमें से एक मुख्य ऐलान स्वास्थ्य को लेकर भी किए गए। इसी के तहत बजट में 17 महंगी कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह से हटा दी गई है।
कैंसर दवाओं से ड्यूटी हटाई
बजट में 17 महंगी कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह हटा दी गई है। इनमें Ribociclib, Venetoclax, Ibrutinib, Ponatinib, Dabrafenib, Trametinib, Toripalimab, Ipilimumab जैसी दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं ज्यादातर इंपोर्ट होती हैं और इनकी कीमत भारत में महीने के 20,000 से 1.5 लाख रुपये तक होती है। ड्यूटी 5% से 11% के बीच थी, जो अब खत्म हो गई। इससे इन दवाओं की लैंडेड कॉस्ट कम होगी और मरीजों को एडवांस्ड ट्रीटमेंट आसानी से मिल सकेगा।
इसके अलावा सात रेयर डिजीज की दवाओं और स्पेशल मेडिकल फूड्स पर भी इंपोर्ट ड्यूटी हटाई गई है। इनमें प्राथमिक हाईपरोक्सालुरिया और सिस्टिनोसिस जैसी बीमारियां शामिल हैं। ये छूट पर्सनल यूज के लिए इंपोर्ट होने वाली दवाओं, मेडिसिन्स और फूड फॉर स्पेशल मेडिकल यूज पर लागू होगी। पिछले साल के बजट में 36 लाइफ-सेविंग ड्रग्स को ऐसी ही छूट मिली थी।
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर भान्सु प्रकाश कलमठ ने कहा कि ये 17 हाई-कॉस्ट कैंसर ड्रग्स पर ड्यूटी हटाना मरीजों के लिए बड़ी राहत है। कई थेरपीज महीने में 20 हजार से 1.5 लाख तक की पड़ती हैं। जाइडस लाइफसाइंसेज के एमडी शर्विल पटेल ने बताया कि 17 कैंसर ड्रग्स और सात रेयर डिजीज ड्रग्स पर छूट से मरीजों तक पहुंच बढ़ेगी। बजट ने एक्सेसिबिलिटी, अफॉर्डिबिलिटी और मरीज केंद्रित पर फोकस किया है, जो बहुत जरूरी है। फिक्की हेल्थ सर्विसेज के को-चेयर और पैरास हेल्थ के एमडी धर्मिंदर नागर ने कहा कि हेल्थकेयर कॉस्ट बढ़ रही है और लाइफस्टाइल वाली बीमारियां टियर-2, टियर-3 शहरों में भी फैल रही हैं। वहां स्पेशलाइज्ड केयर कम है, ऐसे में बजट ने कुछ सुकून दिया है।
बड़े हेल्थकेयर ऐलान
बजट में हेल्थ सेक्टर के लिए कुल 1.1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल से 9% ज्यादा है। ड्रग रेगुलेटरी और क्लिनिकल रिसर्च सिस्टम को मजबूत करने का प्रस्ताव है। इसके तहत 1,000 एक्रेडिटेड क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेशनल नेटवर्क बनेगा। इससे अप्रूवल प्रोसेस ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक होगा और फास्टर, ज्यादा भरोसेमंद क्लियरेंस मिलेगा। बायोफार्मा सेक्टर को बूस्ट देने के लिए ‘बायोफार्मा शक्ति’ प्रोग्राम लॉन्च किया गया है। इसमें अगले पांच साल में 10,000 करोड़ रुपये लगेंगे। NIPER संस्थानों का विस्तार और CDSCO को ग्लोबल अप्रूवल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक मजबूत करना भी शामिल है।
बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने कहा कि 10,000 करोड़ का कमिटमेंट, NIPER का विस्तार, 1,000 क्लिनिकल ट्रायल साइट्स और CDSCO की मजबूती से भारत ग्लोबली मुकाबला कर सकेगा। इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस के सेक्रेटरी जनरल सुदर्शन जैन ने हेल्थ बजट के 1.1 लाख करोड़ और 9% बढ़ोतरी को अच्छा बताया। खैतान एंड कंपनी के पार्टनर समीर साह ने कहा कि ‘बायोफार्मा SHAKTI’ और क्लिनिकल ट्रायल साइट्स से रेगुलेटरी रिफॉर्म और कैपेसिटी क्रिएशन मजबूत होगा। PwC इंडिया के सुजय शेट्टी ने कहा कि टाइम-बाउंड अप्रूवल्स और ज्यादा ट्रायल साइट्स से R&D इकोसिस्टम पर बड़ा पॉजिटिव असर पड़ेगा।

















