पटना । भारतीय शिक्षण मण्डल और पटना विश्विद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को ‘शिक्षण पद्धतियों में भारतीय दृष्टिकोण” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी संपन्न हुई। इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान ने स्वतंत्रता के पश्चात हमारी शिक्षा व्यवस्था में मैकॉले इफेक्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में खामियों को दूर कर उसमे भारतीय मूल्यों के समावेशन का कार्य करके भारतीय शिक्षण मण्डल इतिहास की बड़ी भूल को ठीक कर रहा है। उनका इशारा स्वतंत्रता के बाद शिक्षा में जिस भारतीयता का समावेश होना चाहिए था वह नहीं होकर मैकॉले की विरासत को अब तक ढोते रहने की तरफ था।
शिक्षा का लक्ष्य: गुणों का विकास, श्रेष्ठता थोपना नहीं
उन्होंने आगे बताया की हर समाज, राष्ट्र, व्यक्ति में कुछ विशेष गुण होते है उन गुणों को विकसित करने का माहौल प्रदान करना शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए। दुनियां में भारत एकमात्र ऐसी सभ्यता है जो ज्ञान के संवर्धन और प्रोत्साहन के लिए जानी जाती है। शिक्षा में मूल्यों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया की समानता इंसान की नैसर्गिक चाह है लेकिन लेकिन दूसरी चाह स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मानना भी है, और श्रेष्ठता को दुशरो पर थोपने की प्रक्रिया ने विश्व में खून खराबे को जन्म दिया है। नई शिक्षा नीति पर उन्होंने कहा कि कानून बदल भी दें तब भी आदते बदलने में समय लगता है।
शिक्षा का उद्देश्य: भौतिक और आध्यात्मिक विकास साथ-साथ
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री बी आर शंकरानंद ने शिक्षा के तत्व दर्शन को समझाते हुए बताया कि शिक्षा में परा और अपरा अर्थात भौतिक और आध्यात्मिक तत्वों का समावेश होना चाहिए इसी से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है। पिछले एक सो नब्बे वर्षों से हम शिक्षा में सिर्फ भौतिक तत्वों को प्रधानता दे रहे है इसीलिए हमारी शिक्षा की दिशा भटक गई है। अगले दस वर्षों में मेकोले का एक भी निशान हमारी शिक्षा में नहीं दिखना चाहिए।
शिक्षा ही मानव विकास का मार्ग, संस्कार और मूल्य जरूरी
उन्होंने शिक्षा में नवधा सूत्र की चर्चा करते हुए ज्ञान गृहण के विभिन्न चरणों को श्रोताओ के समक्ष रखा। उन्होंने कहा की मनुष्य के विकास के लिए शिक्षा एकमात्र उपाय है इसलिए हमारे यहां प्रतिक्षण शिक्षण की बात होती है। शिक्षा से संस्कार और मूल्यों की समझ आती है जिससे वह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होती है। कार्यक्रम में पटना विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नमिता सिंह ने भारत की शिक्षा में बिहार के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की हमारा नालंदा विश्वविद्यालय भारत का बौद्धिक गणराज्य रहा है।











